उदयपुर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय की ओर से 77वॉ गणतंत्र दिवस एग्रीकल्चर महाविद्यालय के प्रांगण मंे केन्द्रीय स्तर पर मनाया गया। समारोह में कुलपति प्रो. प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, कुलाधिपति कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने झण्डारोहरण कर मार्च पास्ट की सलामी ली। समारोह में एनसीसी केडेट्स, एयरविंग, होम्योपेथी चिकित्सा महाविद्यालय, फिजियोथेरेपी चिकित्सा महाविद्यालय, बीएड, एमएड, डी.एलएड, ओसीडीसी, कन्या महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने मार्च पास्ट किया। विद्यार्थियों द्वारा देश भक्ति, राजस्थानी गानों  पर रंगारंग प्रस्तुतियों के साथ देश भक्ति से ओतप्रोत नाट्य प्रस्तुतिकरण कर देश भक्ति का संदेश दिया। समारोह में अतिथियों द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने वाले एनसीसी केडेट्स एवं गार्गी पुरस्कार से सम्मानित उत्कृष्ट विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह् एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि संविधान केवल नागरिकों को अधिकार ही नहीं देता, बल्कि उन्हें राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का भी बोध कराता है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण की प्रक्रिया और उसके मूल में निहित भावनाएँ राष्ट्र चरित्र और राष्ट्र बोध को मजबूत बनाती हैं।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि देश तभी उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकता है जब उसके नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को भी प्राथमिकता दें। उन्होंने वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अधिकतम उपयोग हो रहा है, ऐसे समय में संस्कारयुक्त और नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा देना हम सभी का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ दर्शन, ज्ञान परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, योग, वेद और कौशल आधारित प्रशिक्षण से युक्त युवा पीढ़ी तैयार कर हम भविष्य की सभी चुनौतियों और समस्याओं का समाधान करने में सक्षम बन सकते हैं। मूल्यनिष्ठ शिक्षा ही भारत को वैश्विक स्तर पर सशक्त उपस्थिति दिला सकती है।

संविधान भारत की आत्मा:- कुलाधिपति बीएल गु र्जर

कुलाधिपति कुल प्रमुख भंवरलाल गुर्जर ने कहा कि हजारोें वीरों के बलिदान के बाद हमें आजादी मिली और आजादी के बाद देश को सर्वश्रेष्ठ तरीके से चलाने के लिए एक समृद्ध और सशक्त संविधान की आवश्यकता थी। संविधान निर्माताओं ने कठोेर परिश्रम से संविधान को मूर्त रूप दिया। भारत का संविधान भारत की आत्मा है। संविधान निर्माताओंा का उपकार है कि उनके संविधान से भारत आज पूरे विश्व में गौरवशाली व महान लोकतांत्रिक राष्ट्र का दर्जा प्राप्त कर चुका है।  युवाआंे से आव्हान किया कि वे भारत के संविधान को पढ़े।  
संविधान की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए गुर्जर ने कहा कि संविधान की मर्यादा, उसकी मान्यताओं और मूल भावना को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को नैतिकता और संस्कारों से युक्त बनाने के साथ-साथ कौशल विकास की आवश्यकता पर भी वैश्विक दृष्टिकोण के अनुरूप विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा और कौशल विकास के समन्वय से ही सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव है।

संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया।

समारोह में रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, प्रो. गजेन्द्र माथुर, प्रो. जीएम मेहता, प्रो. मलय पानेरी, डॉ. पारस जैन, प्रो. जीवनसिंह खरकवाल,  डॉ. युवराज सिंह , डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड, प्रो. मंजु मांडोत, डॉ. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. शैलेन्द्र मेहता, डॉ. अवनीश नागर, डॉ. बलिदान जैन, डॉ. अमी राठौड, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. धर्मेन्द्र राजौरा, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड, डॉ. संतोष लाम्बा, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. भूरालाल श्रीमाली, डॉ. दिनेश श्रीमाली,  डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. रोहित कुमावत, डॉ. हिम्मत सिंह चुण्डावत,  सहित   विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्ष, कार्यकर्ता, विद्यार्थी एवं शहर के गणमान्य नागरिकोें ने भाग लिया।

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