गोपेन्द्र नाथ भट्ट
राजस्थान का हृदय स्थल अजमेर नगर ,जो इतिहास, आध्यात्म और शौर्य की त्रिवेणी के रूप में जाना जाता है, हाल के वर्षों में एक नए सांस्कृतिक परिवेश का केंद्र बना है जब प्रदेश के विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने एक एक करके मुगल और ब्रिटिश कालीन नामों को बदलकर स्थानीय और भारतीय गौरव से जुड़े नामों को प्राथमिकता देने की पहल की है। विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की यह पहल केवल प्रशासनिक निर्णय भर नहीं है, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान को नए सिरे से परिभाषित करने का उल्लेखनीय और प्रशंसनीय प्रयास भी माना जा रहा है।
अजमेर नगर अपनी विशिष्ठ भौगोलिक स्थिति के कारण ब्रिटिश काल में राजपूताना एजेंसी का मुख्यालय रहा है। इसी कारण कई दशाब्दियों से शहर की कई सड़कें, भवन और सार्वजनिक स्थल अंग्रेज अधिकारियों अथवा कालांतर में मुगल काल के प्रभाव के कारण मुगल शासकों के नाम पर जाने जाते रहे। विधानसभाध्यक्ष देवनानी का मत था कि स्वतंत्र भारत में ऐसे नामों की पुनर्समीक्षा होनी चाहिए। उनका तर्क था कि शहर की पहचान उसके अपने नायकों, संतों और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़नी चाहिए, न कि औपनिवेशिक प्रतीकों से।
विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी के नवाचारों की इस पहल के अंतर्गत अजमेर नगर के कुछ महत्वपूर्ण स्थलों के नामों को बदला गया है। देवनानी ने इसे भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ से जोड़ने और भारतीय नाम देने में अहम भूमिका निभाई है। हाल ही उनकी पहल पर अजमेर के मोइनिया इस्लामिया स्कूल का नाम भी बदला है। इसके पूर्व भी उन्होंने ब्रिटिश कालीन संदर्भ वाले किंग एडवर्ड मेमोरियल का नाम बदल कर दयानन्द विश्रांति गृह कराया है। साथ ही अजमेर की फॉय सागर झील का नाम भी बदल कर इसे वरुण सागर के नाम से नई पहचान दी गई है। अजमेर की फॉय सागर झील अब तक एक ब्रिटिश इंजीनियर मिस्टर फॉय के नाम पर जानी जाती रही थी।
इसके अलावा देवनानी ने अजमेर की आर टी डी सी होटल खादिम का नाम होटल अजयमेरु, एलिवेटेड रोड का नाम रामसेतु, क्रिश्चिन गंज पुलिस स्टेशन का नाम कृष्णगंज पुलिस स्टेशन,आगरा गेट से अग्रसेन चौराहा का तक के मार्ग केके नाम संत शिरोमणी रामदेव मार्ग, सेंट स्टीफन चौराहा से झलकारी बाई तक के मार्ग का नाम वीरांगना झलकारी बाई मार्ग,पंचशील नगर के मार्ग का नाम शहीद मेजर नटवर सिंह शक्तावत मार्ग,आना सागर सप्रेम नगर तक के मार्ग का नाम शहीद अविनाश माहेश्वरी, चौरसियावास रोड का नाम प्रेम प्रकाश आश्रम मार्ग रखा है।
नाम परिवर्तन की इस पहल को लेकर ऐतिहासिक शहर अजमेर में ही नहीं देश भर में व्यापक चर्चा हुई। समर्थकों का कहना था कि यह भारतीय अस्मिता और सांस्कृतिक आत्मसम्मान की दिशा में आवश्यक कदम है। उनका तर्क था कि जब भारत की राजधानी नई दिल्ली सहित देश के अन्य हिस्सों में भी औपनिवेशिक नाम बदले जा रहे हैं, तो अजमेर भी इस प्रक्रिया से अछूता क्यों रहे? वहीं आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या नाम बदलने से वास्तविक विकास की चुनौतियां हल होंगी? हालांकि देवनानी ने स्पष्ट किया कि अजमेर में विकास और सांस्कृतिक पुनर्स्थापन दोनों को साथ-साथ चलाने का गंभीर प्रयास किया जा रहा हैं। देवनानी का तर्क रहा कि स्वतंत्र भारत में औपनिवेशिक या आक्रांताओं से जुड़े प्रतीकों की बजाय स्थानीय इतिहास, संत परंपरा और स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों को सम्मान मिलना चाहिए। उनका कहना था कि नाम परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आत्मगौरव से जुड़ा विषय है। देश में कई स्थानों के नाम परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है और औपनिवेशिक या आक्रांताओं से जुड़े नामों को भारतीय नायकों के नाम पर रखा है । अजमेर में यह पहल उसी व्यापक राष्ट्रीय प्रवृत्ति का हिस्सा मानी गई। इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण और ऐतिहासिक चेतना के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस तरह देवनानी जो कहा वह कर दिखाया है।
विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल ने अजमेर में पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। नाम परिवर्तन की प्रक्रिया ने यह प्रश्न खड़ा किया कि किसी शहर की स्मृति और प्रतीक किसे सम्मान दें। समर्थकों के लिए यह भारतीय गौरव की पुनर्स्थापना का प्रयास है। यह निर्विवाद है कि इस पहल ने अजमेर की राजनीति और सांस्कृतिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा है। विकास कार्यों के साथ-साथ प्रतीकों की राजनीति भी आधुनिक भारत की कथा का हिस्सा बन चुकी है और अजमेर में यह कथा देवनानी की पहल से नए आयाम प्राप्त करती दिखाई दे रही है।
*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 28 फरवरी को होने वाली अजमेर की प्रस्तावित यात्रा*
विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने रविवार को अजमेर के कायड़ विश्रामस्थली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 28 फरवरी को होने वाली अजमेर की प्रस्तावित यात्रा और विशाल जनसभा स्थल का भूमि पूजन किया एवं तैयारियों का जायजा लिया। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और राजस्थान धरोहर प्रमोशन के अध्यक्ष पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत तथा स्थानीय नेता एवं कार्यकर्तगण भी मौजूद थे।
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राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर अजमेर को मिली नई पहचान*
*जो कहा वह कर दिखाया !!*
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