जयपुर, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी ने कहा कि युवा स्वयं अपना लक्ष्य तय करें और कुंठाएं पाले बिना रुचि के विषय लें।
शनिवार को जयपुर के एस.एस.जैन सुबोध पी.जी. महिला महाविद्यालय में आयोजित “पिनाकल -2026” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवा अपने परिवार से संवाद बनाए रखें और मन के भावों को परिवार के सदस्यों को बताने मैं कोई संकोच न करें।
डॉ. देवनानी ने युवतियों का आह्वान किया कि वे अन्याय के प्रति सावचेत रहे, संस्कारवान बने और अपनी संस्कृति को कभी ना भूले। परिवार समाज और राष्ट्र के लिए जिए । टूटते हुए घरों को रोके। समाज के मूल्यों के प्रति दृढ़ता बनाए रखें। राष्ट्र के लिए रियल नारी बने। उन्होंने कहा कि भारत सर्वोपरि है। हम दुनिया में किसी से कम नहीं है। भारत विश्व गुरु था, है और रहेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत में नारी की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
डॉ. देवनानी ने कहा कि वार्षिक उत्सव परिश्रम, प्रतिभा और संस्कार के समन्वय का उत्सव है, जो उत्कृष्टता के शिखर की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने महाविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और आत्मविश्वास का निर्माण कर समाज को सशक्त दिशा प्रदान कर रहा है। ‘सुबोध’ का वास्तविक अर्थ ‘अच्छा ज्ञान’ है, और यह संस्थान उसी उद्देश्य को साकार कर रहा है।
स्पीकर डॉ देवनानी ने नारी शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जब एक नारी शिक्षित होती है, तो पूरा समाज शिक्षित होता है। भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाओं का उदाहरण दिया, जिन्होंने प्राचीन काल में ज्ञान-विमर्श में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. देवनानी ने कहा कि मर्यादा, अनुशासन, प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ कार्य करेंगे तो विकास स्वत: हो जाएगा।
डॉ देवनानी ने कहा कि आज की नारी अब घर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश की संसद और विधानसभाओं में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही है, निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बन रही है और नीतियों को दिशा दे रही है। विज्ञान, तकनीक, सेना, खेल और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र में नारी अपनी पहचान स्थापित कर रही है। अब समय आ गया है कि नारी केवल सहभागिता तक सीमित न रहे, बल्कि नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में खड़ी होकर राष्ट्र के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में पूजनीय माना गया है और जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवत्व का वास होता है।
उन्होंने शिक्षा को केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम न मानते हुए कहा कि यह सोचने की क्षमता, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने का माध्यम है। वर्तमान समय को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार का दौर बताते हुए उन्होंने युवाओं से नवाचार, नेतृत्व और नैतिकता के संतुलन के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
डॉ देवनानी कहा कि भारत विश्व नेतृत्व की ओर अग्रसर है और इस यात्रा में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। नेतृत्व को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाना और दूसरों को प्रेरित करना है।
स्पीकर डॉ देवनानी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई दी और सभी छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री देवनानी ने उत्कृष्ट छात्राओं को सम्मानित किया।इस मौके पर एस एस जैन सुबोध शिक्षा समिति के अध्यक्ष एन आर कोठारी, मानद सचिव एस एस बोथरा, भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अल्पा चौधरी, भारतीय सेना की अधिकारी मेजर नीति बंसल सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद थे। महाविद्यालय की प्राचार्य स्वाति जैन ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
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विकसित भारत में नारी की सहभागिता महत्वपूर्ण हैं - विधानसभाध्यक्ष डॉ.वासुदेव देवनानी
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