नई दिल्ली। जीवन की चुनौतियों को पीछे छोड़कर नई उम्मीदों और सपनों के साथ 21 दिव्यांग एवं निर्धन जोड़े वैवाहिक जीवन की नई यात्रा पर अग्रसर हैं। पिछले चार दशकों से दिव्यांगों एवं जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां और आत्मनिर्भरता का संचार कर रही नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर (राजस्थान) के तत्वावधान में रोहिणी सेक्टर-12 स्थित गोल्डन स्टार बैंक्वेट में शनिवार को दो दिवसीय नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह का शुभारंभ हुआ।
संस्थान द्वारा आयोजित 46वें सामूहिक विवाह समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए दिव्यांग एवं निर्धन जोड़े रविवार को वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सात फेरे लेकर जीवनभर के लिए एक-दूसरे के हमसफर बनेंगे। विवाह से पूर्व प्रथम दिवस पर आयोजित पारंपरिक रस्मों ने पूरे परिसर को उत्सव और भावनाओं से सराबोर कर दिया।
शुभ मुहूर्त में सायं 5:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणपति की स्थापना की गई। इसके साथ ही हल्दी और मेहंदी की मंगल रस्मों का शुभारंभ हुआ। दूल्हा-दुल्हनों के चेहरों पर नए जीवन की चमक और परिवारजनों की आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दे रहे थे। वर्षों के संघर्ष और सामाजिक चुनौतियों के बीच यह अवसर उनके लिए केवल विवाह नहीं, बल्कि सम्मान, स्वीकार्यता और नए सपनों के साकार होने का उत्सव बन गया।
देश के विभिन्न हिस्सों से आए परिजनों, अतिथियों और संस्थान साधकों ने नवयुगलों को हल्दी और मेहंदी लगाकर उनके सुखद, सफल और समृद्ध दांपत्य जीवन की कामना की। महिलाओं ने पारंपरिक विवाह गीतों की स्वर लहरियों पर घूमर और लोकनृत्य प्रस्तुत कर समारोह में उल्लास का रंग भर दिया। पूरा वातावरण मंगल गीतों, हंसी-खुशी और आत्मीयता से गूंज उठा।
समारोह में सैकड़ों अतिथि सहित सेवा-समर्पित भामाशाहों का संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल एवं ट्रस्टी देवेंद्र चौबीसा ने पगड़ी, उपरना और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।
रात्रि में आयोजित महिला संगीत एवं सांस्कृतिक संध्या ने समारोह को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंगों से सजा दिया। राधा-कृष्ण रास, रुद्रावतार हनुमान, मां दुर्गा के नवस्वरूप तथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। देर रात तक चलने वाले इस आयोजन में विवाह गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने खुशियों का अनूठा माहौल बनाया।
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि रविवार प्रातः 10:15 बजे सभी 21 जोड़े वैदिक विधि-विधान और पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेंगे। संस्थान की ओर से प्रत्येक नवदंपती को गृहस्थ जीवन की आवश्यक सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की जाएगी, ताकि वे आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर सकें।
उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि समाज में समरसता, समानता और मानवता के मूल्यों को सशक्त करने का माध्यम है। यह आयोजन उन दिव्यांग और निर्धन परिवारों के लिए आशा की वह किरण है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार को सम्पन्न करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं।
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नई जिंदगी की दहलीज पर दिव्यांग जोड़े, गणपति स्थापना के साथ हल्दी-मेहंदी के शुभ शगुन से शुरू हुआ 46वाँ सामूहिक विवाह समारोह
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