उदयपुर। श्री वासुपूज्य मंदिर सूरज पोल दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक चातुर्मास के अंतर्गत शनिवार को साध्वी डॉ.श्री विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 की पावन निश्रा में दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरिश्वर मसा की पुण्यतिथि श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित गुणानुवाद सभा में गुरु महिमा, आध्यात्मिक चिंतन और भक्तिमय प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमनरुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी द्वारा मंगल गीत से हुआ। इसके बाद ऑर्केस्ट्रा कलाकारों ने “नीले अम्बर पर जब तक सितारे रहे, दादा जिनदत्त का नाम अमर रहे” तथा “मेरी झोंपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, दादा आएंगे” जैसे भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। महिला मंडल की सदस्याओं ने भी गुरु भक्ति से ओत-प्रोत गीत प्रस्तुत किए।
गुरु भक्ति के अंतर्गत साध्वीश्री डॉ.विद्युतप्रभा श्रीजी को कामली ओढ़ाने की बोली का लाभ श्रीमति सुशीला-गजेन्द्र भंसाली ने लेकर साध्वी श्रीजी का बहुमान किया गया तथा दादा गुरुदेव की आरती का लाभ ट्रस्ट के अध्यक्ष राज लोढ़ा ने लिया। इस अवसर पर दादा गुरुदेव को आंगी धारण करा विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
अपने प्रेरक प्रवचन में साध्वी श्री डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहा कि चमत्कार कोई करता नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और पुण्य के प्रभाव से स्वयं घटित होते हैं। उन्होंने कहा कि संसार की उपलब्धियां क्षणिक हैं, जबकि सम्यक्त्व और आत्मकल्याण ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य होना चाहिए। दादा गुरुदेव की कृपा से यदि सम्यक दर्शन प्राप्त हो जाए तो वही सबसे बड़ा सौभाग्य है।
उन्होंने दादा गुरुदेव के जीवन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उनके जन्म के समय ही यह संकेत मिल गया था कि वे भगवान महावीर की साधना कर धर्म प्रभावना का महान कार्य करेंगे। एक साध्वी भगवंत ने बालक को देखकर कहा था कि यदि यह घर में रहेगा तो देहरी का दीप बनेगा और यदि शासन में आएगा तो पूरी धरती का सूर्य बनकर धर्म का प्रकाश फैलाएगा। साध्वी श्रीजी ने कहा कि गुरु भगवंत का सान्निध्य अत्यंत दुर्लभ होता है और जिनके जीवन में गुरु का मार्गदर्शन होता है, उनका जीवन धन्य बन जाता है।
गुणानुवाद सभा में प्रबुद्धजन राज लोढ़ा ने कहा कि दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरिश्वर मसा ने अपने तप, त्याग और करुणा से जैन शासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका जीवन सेवा, संयम और साधना का अनुपम उदाहरण है।
गजेंद्र भंसाली ने कहा कि दादा गुरुदेव केवल एक आचार्य नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर ही समाज में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ किया जा सकता है।
सुभाष महात्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दादा गुरुदेव का जीवन हमें धर्म, विनम्रता, त्याग और मानव कल्याण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा और समर्पण ही आत्मोन्नति का सच्चा मार्ग है।
सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर दादा गुरुदेव के श्रीचरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए। भक्ति, गुणानुवाद और आध्यात्मिक चिंतन से ओत-प्रोत यह आयोजन सभी के लिए अविस्मरणीय बन गया। इस अवसर पर सचिव दलपत दोशी ने बताया कि कार्यक्रम में दादा गुरुदेव जिनदत्त सुरीश्वर जी महाराज की पुण्य तिथि पर पूजा पढ़ाई गई
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गुरु सान्निध्य से ही मिलता है सम्यक्त्व का प्रकाश, दादा गुरुदेव का जीवन मानवता के लिए प्रेरणाःसाध्वी डॉ. श्री विद्युतप्रभा श्रीजी
दादा गुरुदेव श्री जिनदत्त सूरिश्वर जी म.सा. की पुण्यतिथि पर वासुपूज्य दादाबाड़ी में गुणानुवाद,पूजा और श्रद्धा का अनुपम संगम
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