रूपसागर तालाब को लेकर चल रहे विवाद के बीच स्थानीय निवासियों ने कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। वर्षों से क्षेत्र में रह रहे लोगों का कहना है कि रूपसागर तालाब के साथ पहले एक और छोटा तालाब भी मौजूद था, जो निजी खातेदारी भूमि पर स्थित था। उनके अनुसार, दोनों तालाब आपस में जुड़े हुए थे और अतिरिक्त पानी की निकासी की प्राकृतिक व्यवस्था थी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, रूपसागर तालाब लगभग 50 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ था, जबकि उसके आगे स्थित दूसरा तालाब करीब 30 से 35 बीघा क्षेत्र का था। उनका दावा है कि बाद में उस छोटे तालाब की जगह पर वर्तमान में निर्माण हो गया और प्राकृतिक जल प्रवाह प्रभावित हुआ।
### पुरानी पाल और जलनिकासी व्यवस्था का दावा
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले तालाब की पाल कच्ची थी, जिस पर बैलगाड़ियां तक चला करती थीं। बाद में नगर निगम द्वारा सड़क और पक्की पाल का निर्माण कराया गया। उनका कहना है कि सौंदर्यीकरण के दौरान तालाब की निकासी (मोरी) का आकार पहले की तुलना में छोटा कर दिया गया, जिससे वर्षा के समय पानी की निकासी प्रभावित होने लगी।
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि वर्ष 2011 की भारी बारिश के दौरान तालाब में ओवरफ्लो की स्थिति बनी थी। उनका मानना है कि यदि पुरानी जलनिकासी व्यवस्था यथावत रहती तो पानी का दबाव कम हो सकता था।
### जलनिकासी मार्ग पर उठे सवाल
क्षेत्रवासियों के अनुसार, पहले निकासी मार्ग इतना बड़ा था कि एक व्यक्ति उसमें से निकल सकता था, जबकि वर्तमान में उसका आकार काफी छोटा दिखाई देता है। उनका आरोप है कि सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान इस हिस्से में परिवर्तन किया गया, हालांकि यह किसके निर्देश पर हुआ, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।
### गंदे पानी के प्रवेश का आरोप
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान में आसपास की कॉलोनियों तथा क्षेत्र का गंदा एवं नालों का पानी रूपसागर तालाब में पहुंच रहा है, जिससे तालाब का जल प्रदूषित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में तालाब की स्थिति और खराब हो सकती है।
### तालाब संरक्षण और सड़क निर्माण का सुझाव
स्थानीय निवासियों ने सुझाव दिया कि ऐसी योजना बनाई जाए जिससे तालाब का संरक्षण भी हो और आसपास की आबादी को भी जलभराव से नुकसान न पहुंचे। उनका कहना है कि उचित जलनिकासी व्यवस्था और सड़क विकास दोनों कार्य साथ-साथ किए जा सकते हैं।
### सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया उल्लेख
बातचीत के दौरान एक परिवार ने दावा किया कि भूमि से जुड़े विवाद में वे तीन पीढ़ियों से कानूनी लड़ाई लड़ते रहे और इस संबंध में उनके पास सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रति भी उपलब्ध है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र उनके परिवार के लिए ऐतिहासिक और पुश्तैनी महत्व रखता है।
### जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि रूपसागर तालाब की मूल संरचना, पुराने जलनिकासी मार्ग, सौंदर्यीकरण कार्य और तालाब से जुड़े ऐतिहासिक अभिलेखों की तकनीकी एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
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