जैसलमेर। 9 मार्च 2026 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि रेंज छायण के क्षेत्राधिकार में फिल्ड फायरिंग रेंज (प्रतिबंधित क्षेत्र) में मावा गाँव के पास हिरणों का शिकार हुआ है। जिसके पश्चात रेंज छायण की टीम मौका स्थल पर पहँुची। टीम द्वारा मौके पर तत्काल जांच प्रारम्भ की गई। जिसमें जाल, कैर व कीकर की झाडियों में 10 से 15 दिन पुराने चिंकारों के अवशेष बरामद हुए, उन्हे राज तहवील लेकर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत प्रकरण दर्ज कर, अनुसंधान प्रारम्भ किया गया।
प्रकरण की गंभीरता को देखते मुख्य वन संरक्षक, जोधपुर अनुप के. आर. के मार्गदर्शन में एवं उप वन संरक्षक, जैसलमेर कुमार शुभम, सहायक वन संरक्षक, मुख्यालय पोकरण चन्द्रशेखर कौशिक के निर्देशन में क्षेत्रीय वन अधिकारी, छायण लक्ष्मण स्वामी के नेतृत्व में शिकार प्रकरण का खुलासा करने एक विशेष टीम का गठन किया गया हैं।
शिकार पुराना होने से वन विभाग की टीम ने लगातार आस-पास के गाँवों में छापेमारियां प्रारम्भ की। वन-विभाग की टीम द्वारा गहन अनुसंधान एवं मुखबिरों इत्यादि से सूचनाऐं एकत्रित करने के पश्चात तीन व्यक्तियों नराराम, मोहनराम व मुनाराम के शिकार में होने की जानकारी प्राप्त कर, तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने में पहली सफलता हासिल की। इस दौरान पूछताछ में तीनों शिकारियों ने अपना जुर्म कबुल किया एवं प्रकरण में कुछ अन्य अपराधियों के नाम भी सामने आये।
नियमानुसार तीनों आरोपियों को माननीय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, पोकरण के समक्ष दिनांक 10 अप्रैल 2026 को पेश किया गया। माननीय न्यायालय ने तीनों शिकारियों को 5 दिन वन-विभाग की रिमाण्ड में भेजने का आदेश जारी किये। वर्तमान में तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में है ।
टीम द्वारा प्रकरण में अन्वेषण व छापेमारियों के दौरान एक अन्य आरोपी दीपाराम को भी 30 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसको माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। माननीय न्यायालय ने आरोपी को 15 दिवस वन-विभाग की रिमाण्ड में भेजने का आदेश जारी किया हैं।
उल्लेखनिय है कि इस प्रकरण में उक्त आरोपियों के अतिरिक्त अन्य आरोपियों के शामिल होने की सम्भावना के मद्धेनजर वन-विभाग की टीम द्वारा लगातार छानबीन कर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने का सतत् प्रयास किया जा रहा हैं। वर्ष 2024 में घटित फिल्ड फायरिंग रेंज में हुए शिकार में भी उक्त आरोपियों के होने की पूर्ण संम्भावना लग रही हैं, जिसके लिये वन-विभाग की टीम द्वारा अनुसंधान कर कड़ी जोडकर, साक्ष्य एकत्रित करने की कार्यवाही की जा रही हैं।
वन्य जीव अपराधियों को पकड़ने में रेंज छायण के वनपाल झमकू, सहायक वनपाल जगदीश, वन रक्षक अशोक रतनू, रामकिशोर जाखड, कवीता स्वामी, मूलसिंह जोधा, मोहम्मद रमजान सहित अन्य कार्मिकों का विशेष योगदान रहा।
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