कानूनी जागरूकता ही युवाओं की सुरक्षा — मुख्य अतिथि धर्मराज मीणा
राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा मे राष्ट्रीय पुस्तकालय सप्ताह एवं बाल दिवस के उपलक्ष्य मे “बाल एवं युवा अधिवेशन एवं सम्मान समारोह “ कार्यक्रम का आयोजन किया गया | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री धर्मराज मीणा अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश , अध्यक्षता डॉ नंदकिशोर महावर वरिष्ठ साहित्यकार, अति विशिष्ट अतिथि डॉ अनुपमा चतुर्वेदी एसोशिएट प्रोफेसर राजकीय आयुर्वेदिक महाविधालय कोटा , विशिष्ट अतिथि डा ज्योति शर्मा असिस्टेंट प्रोफेसर राजकीय आयुर्वेदिक महाविधालय कोटा, एवं गेस्ट ऑफ ऑनर ममता महक वरिष्ठ साहित्यकार, आमंत्रित अतिथि गजलकार चाँद शेरी रहे | कार्यक्रम का संचालन वयो श्री के.बी. दीक्षित एवं मंच प्रबंधन नरेंद्र शर्मा सदस्य विकास समिति स्थानीय पुस्तकालय कोटा ने किया |
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के दीप प्रज्जवलन रोली तिलक के साथ अतिथियों द्वारा माल्यार्पण कर किया गया | सरस्वती वंदना बाल कलाकार नव्या शर्मा द्वारा प्रस्तुत की गई |
उदघाटन भाषण मे डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष, राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा ने राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस एवं बाल दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुये कहा कि – पुस्तकालय सिर्फ भवन नहीं होते, यह वह स्थान हैं जहाँ एक साधारण बच्चा जीवन बदलने वाली दृष्टि पा सकता है। राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस हमें याद दिलाता है कि ज्ञान तक पहुँच हर नागरिक का अधिकार है, और बाल दिवस हमें यह सिखाता है कि आने वाली पीढ़ियों को सही संसाधन और सही दिशा देना हमारी जिम्मेदारी है। हमारे पुस्तकालय तभी जीवित माने जाएंगे, जब यहाँ आने वाला हर बच्चा अपने भीतर एक नई संभावना जगाकर जाए। इसलिए यह आवश्यक है कि हम पुस्तकालयों को मात्र पुस्तकों का संग्रहालय न बनाकर, बच्चों की कल्पना, जिज्ञासा और चरित्र निर्माण का केंद्र बनाएं।
उदघाटन भाषण के बाद बाल कलाकार होनेश शर्मा के बांसुरी वादन से हुया वही बाल कलाकार नव्या शर्मा ने दोनों हाथो से भगत सिंह की तस्वीर बनाई | ममता महक ने बाल गीत प्रस्तुत किया | वही ख्यात गजलकार चाँद शेरी ने राष्ट्रीय भावनाओ से ओत प्रोत – शरहद की हिफ़ाजद करने वाला हर जवान बोलेगा , यह दिल तो इकबाल का तराना जण गण मन बोलेगा | मातरे वतन पर जान देने की बात आई तो , हमारे लहू का कतरा कतरा हिंदुस्तान बोलेगा |
डॉ. अनुपमा चतुर्वेदी ने बाल एवं युवाओं को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य, दिनचर्या और प्राणायाम के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि – एक मजबूत भविष्य उन बच्चों और युवाओं का ही होता है जो अपने शरीर और मन का अनुशासन समझते हैं। नियमित दिनचर्या, सही भोजन और प्रतिदिन कुछ मिनट प्राणायाम—ये कोई साधारण आदतें नहीं, बल्कि जीवनभर ताकत, धैर्य और संतुलन देने वाले स्तंभ हैं। जो युवा अभी अपनी सेहत को प्राथमिकता देंगे, वही आगे चलकर हर चुनौती का सामना बिना टूटे कर पाएँगे। प्राणायाम सिर्फ सांसों की कसरत नहीं, यह मन को स्थिर करने और आत्मविश्वास को तेज करने की कला है।
डॉ ज्योति शर्मा ने मानसिक स्वास्थ्य एवं डीजीटल उपवास पर संबोधित करते हुये कहा कि – आज की सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि हमारे पास तकनीक कितनी है, बल्कि यह है कि हम उस तकनीक के बीच खुद को कितना संभाल पा रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य तभी मजबूत रहता है, जब मन को थोड़ी साँस मिलती है, थोड़ी शांति मिलती है। डिजिटल उपवास कोई त्याग नहीं, बल्कि अपने आप को वापस पाने की प्रक्रिया है। यदि युवा प्रतिदिन कुछ समय स्क्रीन से दूर रहकर अपने विचारों को सुनें, अपनी भावनाओं को पहचानें और अपने लक्ष्य पर ध्यान दें—तो उनकी एकाग्रता, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। मानसिक फिटनेस वही कीमती पूँजी है, जिसके बिना बाकी सभी उपलब्धियाँ अधूरी रह जाती हैं।’
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री धर्मराज मीणा, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश, ने भारतीय संविधान में बालकों के अधिकारों एवं संरक्षण के संबंध में संबंधित अन्य सुसंगत विधिक प्रावधानों के बारे युवाओं को कानूनी जानकारी देते हुए बताया कि - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 ए शिक्षा का अधिकार, शोषण से सुरक्षा अनुच्छेद 24 स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण में विकास का अधिकार अनुच्छेद 39E, 39F और समानता का अधिकार अनुच्छेद 14 व 15 है, साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण का अधिकार अनुच्छेद 21 व 47 के अंतर्गत मिला है. श्री मीणा ने बताया कि हम लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं जहां कानून का राज है विधि का शासन लोकतंत्र की बुनियाद है हर नागरिक को कानून की पालना करनी चाहिए कानून सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं है, वरन एक नागरिक के संपूर्ण जीवन, समाज और देश के विधिक संचालन में कानून की महत्वपूर्ण भूमिका है. बच्चे और युवा तभी सुरक्षित हैं, बालकों युवाओं और सभी नागरिकों को अपने कर्तव्य अधिकार का बोध होना चाहिए अज्ञानता हमेशा जोखिम बढ़ाती है, जबकि कानूनी जागरूकता व्यक्ति को मजबूत, सतर्क और जिम्मेदार बनाती है। आज की पीढ़ी को समझना होगा कि सोशल मीडिया, दोस्ती, पढ़ाई, काम हर क्षेत्र में कानून की सीमाएँ और सुरक्षा दोनों मौजूद हैं। जो युवा इन सीमाओं का सम्मान करते हैं, वही बिना डर, बिना भ्रम और बिना गलतियों के आगे बढ़ते हैं।’ न्यायाधीश धर्मराज मीणा साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और धर्मराज भारत के नाम से साहित्य सृजन और सेवा में विशेष पहचान रखते हैं.
बाल एवं युवा गौरव से यह हुये सम्मानित
नव्या शर्मा ( बाल कलाकार ) , होनेश शर्मा ( बाल बांसुरी वादक ) , प्रिंस नागवानी (नेशनल शूटर विजेता) , सुभान्शु व्यास (क्रिकेटर- अन्डर 14 नेशनल कवालीफ़ाईड), माखन सिंह (लघु कथा लेखन विजेता ) , तरुण कुमार शर्मा , मोहित मेरोठा, नवीन कुमार शर्मा, शालिनी शर्मा, हर्षिता , नव्या शर्मा , जीविका मेरोठा, उन्नति मिश्रा, मनस्वी , सानवी शर्मा, करण चौधरी ,मधु मंडल, आंचल प्रजापति, श्वेता चौधरी, जसवंत प्रजापति ,माखन सिंह , विजय शर्मा, नेहा तंजीम सागर , मुकेश कुमार भील, बबली मीणा, अंकित राठौर, दीक्षा हाडा , रहनुमा शेख , सुजाता, हेमंत सिंह हाडा समेत 31 प्रतिभागी सम्मानित हुये |
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