कोटा।राजस्थान प्रांत के अग्रणी साहित्यिक ,सांस्कृतिक ,शैक्षिक प्रतिष्ठान- साहित्य मंडल श्रीनाथ द्वारा के तत्वाधान में हिंदी पुरोधा श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति एवं राष्ट्रीय बाल साहित्य समारोह 26 के विशाल सत्र 5- 6 -7 जनवरी को आयोजित किया गया। हिंदी भाषा हमारी संस्कृति और हमारे परिवेश को समझने की आज महत्व आवश्यकता है यह विचार उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्य मंत्री रविकांत करके व्यक्त किया उन्होंने कहा कि यदि हमारी भाषा जीवित रही तो हमारी संस्कृति भी जीवित रहेगी अन्यथा हम अपने लक्ष्य से भटक जाएंगे।
समारोह में 7 जनवरी को कोटा की शिक्षक व साहित्यकार डॉक्टर सुशीला जोशी को भारत से आए हुए मूर्धन्य साहित्यकारों के सानिध्य में "बाल साहित्य भूषण" की मानद उपाधि से विभूषित किया गया ।साथ ही अभिनंदन पत्र ,शाल, माला , मेवाड़ी पगड़ी,श्रीफल एवं श्रीनाथजी की छवि के साथ उनका अभिनंदन किया गया।1100रु पारितोषिक रुप से उन्हें नवाजा गया ।यह सम्मान उन्हें उनके बाल काव्य संग्रह "भोर के तारे "के लिए दिया गया।
कार्यक्रम का आगाज सरस्वती वंदना के साथ हुआ
इसी रोज बाल साहित्य आलेख वाचन में भरतपुर के नरेंद्र निर्मल ने बाल कहानियां "संस्कृत के संदर्भ में" तो मथुरा की श्रीमती ऋचा अग्रवाल ने बाल कहानी में नैतिक मूल्य"प्रकाश डाला आदि महत्वपूर्ण विषयों पर आलेख वाचन हुआ।
कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रभाषा हिंदी से संबंधित प्रार्थना से हुआ कार्यक्रम का संचालन साहित्य मंडल श्रीनाथ द्वारा के प्रधानमंत्री श्री प्रकाश देवपुरा के द्वारा किया गया
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