कोई भी अखबार छोटा या फिर बढ़ा नहीं होता सभी पत्रकार बिक जाते है यह झूँठ भी होता है। में बात कर रहा हूँ कोटा के सपूत चम्बल के शेर आग उगलने वाली निर्भीक लेखनी के धनी गुदड़ी के लाल मनोहर पारीक की जिसने देश में लोकतंत्र के मन्दिर लोकसभा में सरकार बचाने को लेकर बहुमत हासिल करने के लिए सांसदों को रिश्वत देकर सरकार बचाने का भंडाफोड़ किया। मनोहर पारीक और में पत्रकारिता के कई उतार चढ़ाव में साथ सहयोगी रहे है। कभी नहीं हारना अभावो में रहकर भी अपने सिद्धांतो की प्रति अटल,अडीग रहना ।न टूटना, रूठना,न ऐंठना निर्भीकता और निष्पक्षता से अपनी बात कहना और अपने और पत्रकारों के हक़ के लिए संघर्ष करना इनका स्वभाव है।यही वजह है के मनोहर पारीक कोटा प्रेस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित है। जर्नलिस्ट एसोसिएशन जार के वरिष्ठ पदाधिकारी  मनोहर पारीक अपनी टीम के साथ पत्रकारों को रियायती दर पर भूखण्ड दिलाने छोटे मंझोले समाचार पत्रो को विज्ञापन दिलवाने  और छोटे पत्रकारों की अधिस्वीकरण से लेकर सभी सुविधाओ को लेकर उनके मान सम्मान की रक्षा को लेकर संघर्षरत रहने के कारण मनोहर पारीक से  कुछ सामन्तवादी सोच के पत्रकार रात की पार्टियों वाले पत्रकार नाराज़गी रख सकते है। लेकिन मनोहर पारीक ने राष्ट्रिय स्तर पर ,सांसद रिश्वत काण्ड उजागर कर उन्हें दण्डित करवाने में जो महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके इस कृत्य से कोटा की पत्रकारिता का गौरव भारत के ही नहीं विश्व निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता के इतिहास में लिखा जाएगा।कोटा के एक छोटे से अख़बार जनधारणा पक्ष के मालिक मनोहर पारीक देश भर में सांसद रिश्वत काण्ड मामले के मुख्य  फरियादी सूत्रधार बने और इस मुद्दे ने देश भर में हलचल मचा कर सियासी उलटफेर कर दिया। खोजपूर्ण पत्रकारिता के हस्ताक्षर भाई मनोहर पारिक को इस मामले में मुख्य गवाह होने के कारण पूर्व प्रधानमंत्री नर्सिंम्मा राव के  समर्थकों ने खरीदने की कोशिश की और डराने धमकाने की कोशिश की है लेकिन पत्रकारिता का  यह सिपाही अड़ीग अटल खड़ा रहा और अपने बयानों पर क़ायम रहा।मनोहर पारीक ने देश को बता दिया के बढ़ी घटनाओं को छुपाने वाला बिकाऊ मिडियाचाहे घटनाये कितनी ही छुपा ले लेकिन अगर एक छोटा अख़बार भी।निष्प्क्षत्ता और निर्भीकता दिखा,दे तो बिकाऊ मिडिया के सब किये धरे पर पानी फिर जाता है।कोटा प्रेस क्लब के सक्रिय पदाधिकारी वरिष्ठ उपाध्यक्ष  , पत्रकार संगठन ,जार के पदाधिकारी मनोहर पारीक यूँ तो सुनेल  भवानीमंडी क्षेत्र के है लेकिन  संघर्षो में गुज़रे इनके जीवन ने  इन्हे  तराश कर  पत्रकारिता में हीरा बना दिया। भाई मनोहर पारीक ने पहले जे के फेक्टरी में काम किया फिर हालात बदल जाने के बाद दैनिक नवज्योति ,,राष्ट्रदूत ,,धरती करे पुकार ,,,देश की धरती , जननायक और  कई विज्ञापन एजेंसी में काम किया लेकिन दूसरों का काम करना  टोका टाकी इस बेबाक शख्सियत को रास नहीं आई और खुद मनोहर पारीक ने अपना साप्ताहिक अख़बार जनधारणा पक्ष निकाला जिसे बाद में सांध्य दैनिक कर दिया ।पत्रकारिता में हमेशा सकारात्मक निष्पक्ष निर्भीक विचार ,सिर्फ ,खुद को आगे बढ़ाओ किसी को पीछे मत धकेलो वाले सिद्धांत पर चलने वाले  मनोहर पारीक जब दिल्ली में एक बैंक में थे। तब उन्हें सरकार बचाने को लेकर सांसद खरीद फरोख्त मामले में रिश्वत खोरी की भनक लगी पारीक ने तहक़ीक़ात की खबर को जांचा परखा खबर में खतरा था।लेकिन उन्होेन इस खबर को अपने अख़बार में लीड खबर बनाया सभी ने इस खबर को गॉसपिंग खबर बताकर मज़ाक उड़ाया लेकिन  पारीक डिगे नहीं और एक दिन जब सी बी आई से उनके पास सुचना पहुंची के उनके अख़बार की खबर की  पुष्टि के बाद उसे आधार बनाते हुए सांसद रिश्वत काण्ड मामले में प्रथम सुचना रिपोर्ट दर्ज की गयी है ।तो रातो रात यह मनोहर पारीक सुर्ख़ियों में आ गए कांग्रेस के कई लोगों का इन पर दबाव था ।इन्हे प्रलोभन दिए जा रहे थे। धमकिया दी जा रही थी लेकिन चम्बल का पानी था कैसे बिकता क्यों डरता बस फिर पुरे देश में इनकी एक छोटे से अख़बार की खबर से हंगामा  बरपा हुआ और फिर इनका अख़बार सुर्ख़ियों में बढ़े अख़बारों के मुक़ाबिल आ गया।पत्रकारिता को कैसे राष्ट्रवाद के लिए आक्रामक बनाना है  ना जाती ना धर्म ना समाज ना काहू से दोस्ती ना काहू से बेर के सिद्धांतों पर पत्रकारिता के आयाम स्थापित किया। देश भर के सभी समाचार पत्रों में।उनकी खोजपूर्ण  पत्रकारिता पर आलेख प्रकाशित हो चुके है। कई दर्जन खोजपूर्ण पत्रकारिता के पुरस्कार उन्हें मिल चुके है। ऐसे पत्रकार जो झुका नहीं जो दुनिया को झुकाना जनता है। मनोहर पारीक को सलाम सेल्यूट अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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