कोटा | राजस्थान आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार और मिलीभगत का खेल खुलेआम चल रहा है। एक तरफ प्रदेश के आबकारी आयुक्त सख्त लहजे में आदेश जारी कर नियमों की पालना की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कोटा के शराब ठेकेदार इन आदेशों की धज्जियां उड़ाकर खुलेआम सरकार को चुनौती दे रहे हैं।
आबकारी आयुक्त (उदयपुर) द्वारा जारी आदेश (क्रमांक F-32(B) 546) में स्पष्ट रूप से राजस्थान आबकारी नियम, 1956 के नियम 77-बी का हवाला देते हुए शराब के विज्ञापनों, बोर्ड और होर्डिंग्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। लेकिन कोटा में हकीकत इसके ठीक उलट है:
सीएडी सर्किल रोड पर
लकी वाइन' पर भी बड़े-बड़े विज्ञापन राहगीरों को लुभा रहे हैं। लक्की वाईन के अलावा लगभग 119 और शराब की दुकान है जिनपर अभी भी इस तरह के बोर्ड लगे हैं।
हैरानी की बात यह है कि ये दोनों स्थान शहर के सबसे व्यस्ततम इलाकों में आते हैं, जहाँ से आबकारी विभाग के दस्ता और पुलिस प्रशासन दिनभर में दर्जनों बार गुजरता है। बावजूद इसके, इन पर कोई कार्रवाई न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। रेट लिस्ट गायब
क्या जनता को लूटने की है तैयारी?
आदेश का दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह था कि हर दुकान पर रेट लिस्ट (MRP) का बोर्ड ऐसे स्थान पर लगाया जाए जो सबको दिखाई दे। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई दुकानों पर या तो रेट लिस्ट गायब है या उसे जानबूझकर छुपाकर रखा गया है।
क्या रेट लिस्ट न लगाकर ग्राहकों से प्रिंट रेट से अधिक वसूली (Over-rating) का खेल खेला जा रहा है? बिना रेट लिस्ट के आम आदमी को पता ही नहीं चलता कि उससे शराब के नाम पर कितनी अतिरिक्त वसूली की जा रही है।
जब विभाग ने आदेश दिया था कि इन अवैध विज्ञापनों को हटाकर 'पालना रिपोर्ट' तत्काल भेजी जाए, तो कोटा के जिला आबकारी अधिकारी अब तक चुप क्यों हैं? क्या ठेकेदारों के रसूख के आगे प्रशासन नतमस्तक है? शहर में चर्चा है कि बिना विभागीय 'आशीर्वाद' के नियमों का इस तरह सरेआम उल्लंघन संभव नहीं है।
पुलिस और प्रशासन का रुख
कोटा पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम शहर की कानून व्यवस्था और यातायात सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त हैं। नियमों के विरुद्ध लगे ये बड़े होर्डिंग्स न केवल विज्ञापनों पर रोक का उल्लंघन हैं, बल्कि सड़क पर वाहन चालकों का ध्यान भटकाने का कारण भी बनते हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इस गंभीर लापरवाही पर क्या संज्ञान लेता है।
आदेश के 4 महीने बाद भी कोटा में होर्डिंग्स क्यों नहीं हटे।
पालना रिपोर्ट में अब तक क्या कार्रवाई दिखाई गई है?
* अवैध विज्ञापन लगाने वाले ठेकेदारों का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू हुई।
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