कोटा। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वीणा सक्सेना की दो महत्वपूर्ण कृतियों – “सनातन को समर्पित कल्पवास” एवं “गोवर्धन परिक्रमा से राबिनाहूड मेराथन तक” – के लोकार्पण एवं परिचर्चा समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री जितेन्द्र निर्मोही ने की। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ नेत्र सर्जन एवं लेखक डॉ. सुरेश पाण्डेय रहे।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. सुशील चंद्रशेखर (वरिष्ठ मनोचिकित्सक), डॉ. अरविंद सक्सेना (वरिष्ठ इतिहासकार), डॉ. बी.एल. भाट (वंशावली विशेषज्ञ), श्री राम मोहन कौशिक (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद), डॉ. नेहा प्रधान (प्रोफेसर), डॉ. आदित्य गुप्ता (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, हिन्दी) तथा डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष, राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय, कोटा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. नीरिजा श्रीवास्तव, प्रोफेसर द्वारा किया गया।
अपने संबोधन में अतिथियों ने डॉ. वीणा सक्सेना के साहित्यिक अवदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी दोनों पुस्तकें आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। “सनातन को समर्पित कल्पवास” भारतीय आस्था और परंपरा की गहन व्याख्या प्रस्तुत करती है, वहीं “गोवर्धन परिक्रमा से राबिनाहूड मेराथन तक” जीवन यात्रा के विविध प्रेरक आयामों को सामने लाती है।
इस अवसर पर जितेन्द्र निर्मोही ने कहा कि – “पिछले दो तीन वर्षों में महिला लेखन में गुणात्मक सुधार हुआ है। आज़ हाड़ौती अंचल की लेखिकाओं को देश में पहचान मिली है। मंडल पुस्तकालय कोटा साहित्य लेखन का स्वर्णिम युग में योगदान दे रहा है। लेखिका बीना सक्सेना की कृतियां यात्रा वृत्तांत और संस्मरण साहित्य का समत्व लिए है।इनकी कृतियां अमरीका और ब्रिटेन में बसे इनके परिजनों को सनातन संस्कार दे रही हैं।
कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. विशाल सक्सेना, डॉ. विकास सक्सेना, डॉ. राखी सक्सेना, काशिका एवं वीर सक्सेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।समारोह में साहित्य प्रेमियों, शिक्षाविदों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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