राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, कोटा में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर विविध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पाठकों ने सामूहिक रूप से सत्यजीत रे द्वारा निर्देशित टैगोर जी के जीवन-वृत्त एवं साहित्यिक योगदान पर आधारित डॉक्यूमेंटरी का का अवलोकन किया। इस अवसर पर टैगोर साहित्य की विशेष पुस्तक प्रदर्शनी, विचारोत्तेजक “टैगोर विमर्श” एवं भावपूर्ण “रबीन्द्रो संगीत” प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरुदेव को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजेन्द्र कुमार पारीक मुख्य अभियंता एवं महानिदेशक सिचाई प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान , अध्यक्षता डॉ नील प्रभा नाहर वरिष्ठ चिकित्सक एवं साहित्यकार , विशिष्ट अतिथि डॉ प्रीतिमा व्यास तथा गेस्ट ऑफ ऑनर बिगुल कुमार जैन रहे | विशिष्ट आमंत्रित अतिथि लेखराज शर्मा , डॉ प्रशांत भारद्वाज , डॉ नवीन शर्मा रहे |
डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव संभागीय पुस्तकालय अध्यक्ष ने बताया की इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य, संस्कृति एवं महान साहित्यकारों के जीवन-दर्शन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पाठक, विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा का विषय “रबीन्द्र संगीत में निहित मानवीय मूल्य एवं समकालीन समाज में उनकी प्रासंगिकता” था जिसमे मुख्य अतिथि राजेन्द्र पारीक ने मुख्यतया रबीन्द्र संगीत में मानवता और विश्वबंधुत्व , प्रकृति प्रेम और पर्यावरण चेतना , आध्यात्मिकता एवं आत्मिक शांति , राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक अस्मिता , प्रेम, करुणा और सह-अस्तित्व के मूल्य , आधुनिक पीढ़ी में रबीन्द्र संगीत की प्रासंगिकता एवं साहित्य, संगीत और नैतिक मूल्यों का समन्वय” जेसे प्रमुख बिन्दुओ पर पाठको का ध्यान केन्द्रित किया |
डॉ नील प्रभा नाहर ने बताया कि रबीन्द्र संगीत वह संगीत शैली है जिसमें रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे और स्वरबद्ध किए गए गीत गाए जाते हैं। इसे बंगाली संस्कृति की आत्मा माना जाता है। टैगोर ने लगभग 2200 से अधिक गीतों की रचना की, जिनमें प्रकृति, प्रेम, भक्ति, मानवता, राष्ट्रप्रेम, आध्यात्म और जीवन-दर्शन की गहरी अनुभूति मिलती है। मंच संचालन कार्यक्रम संयोजिका डॉ शशि जैन ने किया | कार्यक्रम का प्रबंधन अजय सक्सेना एवं वीडीयो प्रबंधन यतिश सक्सेना ने किया |
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