कोटा। किसानों की संस्था मानी जाने वाली सरस डेयरी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। डेयरी में कार्यों की लागत, भुगतान प्रक्रिया और कथित दलालों की सक्रियता को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि जिन कार्यों की वास्तविक लागत करीब ₹100 होती है, उनके नाम पर ₹1000 तक के बिल पास किए जा रहे हैं, जिससे डेयरी को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है।
जानकारों का कहना है कि डेयरी में कथित बिचौलियों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है और किसानों के हितों के बजाय कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा है। आरोप है कि इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद प्रबंधन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कथित दलालों को संरक्षण मिलने की चर्चा भी डेयरी परिसर में जोरों पर है। आरोप है कि अनियमितताओं पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित लोगों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे डेयरी की वित्तीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
यह भी चर्चा है कि प्रबंध निदेशक (एमडी) पूर्व में जांच में सहयोग नहीं करने के मामले में विभागीय कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। ऐसे में डेयरी की कार्यप्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
किसान संगठनों और डेयरी से जुड़े लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों की संस्था का पैसा किसानों के हित में ही खर्च हो और डेयरी की पारदर्शिता बनी रहे।
(नोट: यह समाचार विभिन्न पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों और स्थानीय चर्चाओं पर आधारित है। संबंधित प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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