सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय में कोटा में देश भर में हाड़ौती अंचल की खुशबू बिखेरने वाले लोकप्रिय गीतकार, कृतिकार बाबू बंजारा द्वारा रचित कृति " फूल मिलें या खार" का लोकार्पण समारोह सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में सबसे पहले माँ शारदे का पूजन अर्चन मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया, सरस्वती वंदना गीतकार लोकेश मृदुल ने की। समस्त मंचस्थ अतिथियों का स्वागत सम्मान माला, शॉल, साफा, प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मान परिवार जनों द्धारा किया गया।
उसके पश्चात् स्वागत उद्वब पौत्र ने दिया
इस कार्यक्रम में ओजस्वी कवि एवं विशिष्ट अतिथि ओम सोनी,मधुर अन्ता ने कहा कि " बाबू बंजारा मूलरूप से लोककवि है, आप इतने सहज है, कि जब वो आध्यात्म को लिखता है, उसका परिणाम होता है इतनी अच्छे कवि आप सबके सामने है। बंजारा जी महज एक मंचीय कवि नहीं है, उसके अंदर जो कवि जिन्दा है यह कृति उसका परिणाम है। "
दीपक श्रीवास्तव ( अधीक्षक, सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, कोटा) " बाबू बंजारा अपने आप में बहुत विनम्र है, हास्य कवि या अभिनेता का दर्द सबसे ज्यादा होता है, उसके मन में सबसे ज्यादा दुःखी होता है। आज बाबू बंजारा जी ने यह साबित कर दिया कि मंचीय प्रभाव से भरपूर है लेकिन दोहा साहित्य भी प्रभावित कर सकते हैं। " हाड़ौती अंचल के लोकप्रिय गीतकार एवं विशिष्ट अतिथि मुकुट मणि राज ने कहा कि " इतने अच्छे अभिव्जना के दोहे लिखें हैं, दोहा बहुत पुराना छन्द है, देश का कोई सा भी ग्रन्थ देख लो लेकिन उसमें दोहे मिल जायेंगे, "बंजारा मोती निकालना शुरू किया है और भी कृतियाँ लेकर आयेंगे, विशिष्ट अतिथि एवं वरिष्ठ गीतकार दुर्गा दान सिंह गौड़ ने कहा कि " तीन आदमियों ने दोहे में महारथ हासिल की है, रामनारायण हलधर, नैनवॉं के जयसिंह आशावत, और यह तिसरी कृति है, कोई भी भाषा या बोली छोटी नहीं होती है।
जगदीश सोंलकी ने कहा कि " बाबू जबसे कविता पढ़ने लगा है तबसे मै जातना हूँ, बाबू ने कभी भी अपने दिल पर दिमाग हावी नहीं होने दिया, आप जो लिख रहे हैं, बहुत अच्छा लिखा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं
मुख्य अतिथि विजय जी स्वर्णकार ने कहा कि " आज इस आयोजन में आकर भाग्यशाली समझ रहा हूँ, मानवीय मूल्यों है वह संवाहक है, सबसे लोकप्रिय विधा दोहा है, हमनें कबीर को सुना, तुलसी को सुना है, किताबें झाकती है बन्द अलमारी के शिशो से, बड़ी हक से ताकती है, महिनो इन्तजार करती है, आपने जो दोहा परिवर्तन किया है वह वन्दनीय है, अध्यक्षता कर रहे कोटा महानगर के पूर्व महापौर महेश विजय ने कहा कि " आज इस पावन अवसर पर बाबू वैसे तो चटपटी लिखता है, लेकिन परोसता बहुत मीठा है, आप मीठे का बहुत शोकिन है, साहित्य को बहुत ज्यादा देर तक पचाना आसान नहीं है, लेखक और कवि को बदलने पड़ेगा, आज सास बहू का जिस तरह सम्बन्ध है उस तरह का बनाना पढ़ेगा, समय के हिसाब से टेक्नोलॉजी बदल रहा है, आज भी कवि को सुनने के लिए पूरी रात श्रोता बेठा रहता है, कहा जाता है कि साहित्यकार समाज का दर्पण होता है, लेकिन दर्पण कैसा हो आज साहित्यकार को समझने की जरूरत है, एक प्रबुद्ध व्यक्ति जो उसके मन में एक ही भाव होना चाहिए, हम सुधरेंगे जग सुधरेंगे, आप समाज की जान, है, पहचान है। युवा व्यगं्कार नहुष व्यास ने कहा कि " बंजारा जी की साहित्य यात्रा चार दशकों की है, करवाड़ में जन्मे बंजारा आज पूरे देश में हाड़ौती अंचल की माटी खूशबू को पूरे देश में बिखेरा है। बंजारा जी ने हास्य के प्रसिद्ध लोकप्रिय गीत लाडू बाटी, मेला जैसे गीतों पर हंसाया है तो चेतक और महाराणा जैसे मार्मिक गीत पर रुलाया भी है, कारगिल के समय आपने देश भक्ति के गीत पढ़कर भी देश भक्ति की भावना भी जगाई है। " लोकप्रिय गीतकार बाबू बंजारा ने कहा कि "कवि सम्मेलन के मंचों पर आदरणीय विश्वामित्र दाधीच, दुर्गा दान सिंह गौड़, मुकुट मणिराज आदर्श रहे हैं, "।
इस आयोजन कार्य क्रम , वरिष्ठ साहित्य कार जितेंद्र निर्मोही, हेमराज सिंह हेम,योगीराज योगी, भगवती प्रसाद गौतम, दुर्गा शंकर बैरागी, अन्नू सिंह धाकड़, राजेन्द्र पंवार, रूपनारायण संजय,, डॉ शिव लहरी, प्रेम शास्त्री, महेश पंचोली, रामावतार सागर, सुरेश पण्डित, जगदीश निराला, भेरूलाल भास्कर, रामगोपाल गौतम, रामेश्वर शर्मा, रघुनंदन हटीला, , के सी राजपूत, जोधराज मधुकर, नन्द सिंह पंवार, विजय शर्मा, राजेन्द्र पंवार, निशामुनि गौड़, बद्रीलाल दिव्य, महावीर मेहरा, अखिलेश अखिल, रविन्द्र बीकावत, योगेश यर्थाथ, हलीम आयना, विष्णु शर्मा हरिहर, मुरली धर गौड़, डॉ नन्दकिशोर महावर, नवीन गौतम, श्याम अंकुर,चेतन मालव, विष्णु विश्वास मातृशक्ति में डॉ कृष्णा कमसिन, श्यामा शर्मा और परिवार जनों में धर्मपत्नी निरंजना सोनी, पुत्र हरषुल सोनी, पुत्रियाँ रितु सोनी, अंतिमा सोनी, अदिति सोनी है की गरीमामयी उपस्थिति आयोजन में चार चांद लगा रही थी।
इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, कोटा, मधुकर काव्य संस्थान, राष्ट्रीय कवि संगम, चम्बल साहित्य समिति, सृजन साहित्य मंच सहित कई संस्थाओं ने कवि बंजारा का सम्मान किया।
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बाबू बंजारा की कृति "फूल मिलें या खार" का लोकार्पण
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