उदयपुर,  महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर के कीट विज्ञान विभाग आईपीएम थियेटर में जैविक कृषि द्वारा कौशल विकास विषय संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. प्रताप सिंह, माननीय कुलगुरू, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुये वर्तमान में भारतीय कृषि में जैविक कृषि की उपयोगिता एवं महत्वता पर प्रकाश डालते हुये किसानों को जैविक कृषि की विभिन्न विधाओं के बारे में बताया। जैविक कृषि के द्वारा गुणवान फसल से किसान अपना तथा समाज जन के स्वास्थ्य को अच्छा रख सकते हैं साथ ही ऐसी फसल को बाजार में बेचने पर अधिक लाभ प्राप्त होता है । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्री परमान्नद जी, चित्तौड़ प्रान्त संगठन मंत्री, भारतीय किसान संघ ने अपने ओजस्वी वाणी से किसानों को सम्बोधित किया तथा किसानों को गौ आधारित कृषि की महत्वता एवं उपयोगिता के बारे में बताते हुए किसानों को भारत की आगामी पीढ़ी एवं कृषि को ध्यान में रखते जैविक कृषि अपनाने का आह्वान किया। भारतीय गाय का गोबर एवं मूत्र में लाखों की संख्या में जीवाणु पाये जाते हैं और उससे बने खाद एवं जैविक उत्पाद को खेत में डालने से मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ती है जिससे फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्वि होती है । डॉ. जे. पी. मिश्रा निदेशक अटारी ने कृषि विज्ञान केन्द्रो के द्वारा किसानों के लिए तथा जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार प्रयासरत है और सरकार ने जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिये बहुतसी योजनाओं को क्रियान्वित किया है जिन्हें कृषि विज्ञान केन्द्र जो कि प्रत्येक जिले में कार्यरत है उनके द्वारा किसान के प्रत्येक खेत पर पहॅुचने की तैयारी है, जिसमें विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को कृषि तकनीकी पहॅुचा कर उन्हें कैसे लाभान्वित किया जा सकता है उन योजनोओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी । कार्यक्रम के समन्वयक एवं राजस्थान कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. मनोज कुमार महला ने विभिन्न फसलों में लगने वाले कीट और उनसे होने वाले नुकसान व नियन्त्रण के बारे में बारिकी से बताया । जैविक कृषि में फसलों पर लगने वाले कीटों का जैविक उत्पाद के माध्यम से ही कीट नियन्त्रण किया जा सकता है, जिसमें फिरेमाॅन ट्रेप तथा वनस्पतियों से बनाये जाने वाली दवाओं के द्वारा कीट नियंत्रण पर चर्चा की । डेयरी एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. लोकेश गुप्ता ने जैविक कृषि में पशुधन के रखरखाव और आहार के बारे में किसान भाईयों को बताया। इस कार्यक्रम में 160 किसान भाईयों, विद्यार्थी एवं विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम में किसानों को जैविक कृषि से संबंधित कीट किसानो को वितरित किये गये। अन्त में महाविद्यालय के डॉ. जगदीश चौधरी, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, सस्य विज्ञान विभाग ने कार्यक्रम में प्रधारे सभी महानुभवों का आभार प्रकृट किया।

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