उदयपुर । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीन संचालित कृषि एव कृषि आधारित उद्योगों में ऊर्जा परियोजना केन्द्र महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर को वर्ष 2025 के लिए उत्कृष्ट अनुसंधान, नवाचार एवं प्रभावी विस्तार गतिविधियों के लिए सर्वश्रेष्ठ केन्द्र पुरूस्कार से सम्मानित किया गया है। इस अवसर पर परियोजना प्रभारी डॉ. एन. एल. पंवार ने पूरी टीम की कड़ी मेहनत, समर्पण और सहयोगात्मक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने आई.सी.ए.आर., विश्वविद्यालय प्रशासन एवं सभी सहयोगी वैज्ञानिकों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। आणंद कृषि विश्वविद्यालय गुजराज में जनवरी 29-31, 2026 तीन दिवसीय कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों में ऊर्जा की अखिल भारतीय समन्वित परियोजना की वार्षिक सगोष्ठि में विश्वविद्यालय के नवीकरणीय ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग में संचालित इस परियोजना के केन्द्र को देश के 16 केन्द्रो में सर्वश्रेष्ठ केन्द्र घोषित किया गया है। यह पुरूस्कार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी) डॉ.. एस. एन. झा के कर कमलों से प्राप्त हुआ। इस परियोजना में डॉ..नारायण लाल पंवार तथा डॉ.. निकिता वधावन कार्यरत है। विदित है कि यह पुरूस्कार विभाग द्वारा किये जा रहे शोध की गुणवत्ता तथा राष्ट्रीय दिन की महत्ता को देखते हुए प्रदान किया गया। इस परियोजना में विश्वविद्यालय सोडियम आयन बैटरी पर कार्य चल रहा है तथा इसकी गुणवत्ता सुधार पर भी कार्य कर रहा है। परियोजना प्रभारी डॉ. पंवार ने बताया कि बैटरी में उपयोग किये गये सभी आवश्यक सामान भारत निर्मित है जो मेक इन इंडिया के सपने को फलिभूत करता है।
माननीय कुलगुरू डॉ. प्रतापसिंह ने यह केन्द्र को ’’सर्वश्रेष्ठ केन्द्र पुरूस्कार’’ प्राप्त करने पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केन्द्र की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान विश्वविद्यालय की सुढृढ अनुसंधान परंपरा, वैज्ञानिक उत्कृष्टता एवं समाजोन्मुखी दृष्टिकोण का प्रतीक है। कुलपति महोदय ने उल्लेख किया कि केन्द्र द्वारा किए गए अनुसंधान एवं विस्तार कार्यों से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है और कृषि क्षेत्र में नवाचार को नई दिशा प्राप्त हुई है। उन्होंने वैज्ञानिकों के समर्पण, अनुशासन एवं सामूहिक प्रयासों की सराहना की। निदेशक अनुसंधान डॉ. अरविन्द वर्मा ने केन्द्र को ’’सर्वश्रेष्ठ केन्द्र पुरूस्कार’’ प्राप्त करने पर हाद्र्विक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केन्द्र के वैज्ञानिकों, तकनीकी एवं सहायक कर्मचारियों की प्रतिबद्वता, टीमवर्क और निरंतर परिश्रम का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा किए गए गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान एवं प्रभावी विस्तार कार्यो ने न केवल वैज्ञानिक उत्कृष्टता को दर्शाया है, बल्कि किसानों की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान प्रदान कर कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। निदेशक (अनुसंधान) ने आशा व्यक्त की कि यह केन्द्र भविष्य में भी इसी उत्साह के साथ नवाचार, तकनीक विकास एवं किसान-कल्याण के लिए कार्य करता रहेगा और अन्य केन्द्रों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनेगा।
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