उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर के कुलपति डॉ. प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय में बीज उत्पादन की समीक्षा बैठक में बीज उत्पादन को विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी संबंधित अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि प्रत्येक बुवाई ऋतु में किसी भी कृषि फार्म की भूमि को खाली नहीं छोड़ा जाए।

उन्होंने कहा कि चाहे वह अनुसंधान फार्म हो, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) हो अथवा विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के फार्म हों, सभी स्थानों पर उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कुलपति डॉ. प्रताप सिंह ने विशेष रूप से जायद फसल के रूप में जायद मूंग के उत्पादन पर बल देते हुए कहा कि वर्तमान में गेहूं, सरसों एवं चने की कटाई के तुरंत बाद उसी भूमि पर जायद मूंग की बुवाई कर उत्पादन लिया जा सकता है। इससे भूमि का बेहतर उपयोग होगा, उत्पादन में वृद्धि होगी तथा विश्वविद्यालय के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि बीज उत्पादन को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय के सभी कृषि फार्मों पर यदि किसी प्रकार की समस्याएं या कठिनाइयां हैं तो उन्हें आगामी बैठक में अवगत कराया जाए, ताकि उनके समाधान के लिए आवश्यक प्रयास किए जा सकें और कृषि फार्मों की उत्पादक क्षमता का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित हो सके।

इस बैठक में डॉ. अरविंद वर्मा, निदेशक अनुसंधान, डॉ. आर. एन. सोनी, निदेशक प्रसार शिक्षा, डॉ. हेमलता शर्मा, सह निदेशक (बीज एवं फार्म), डॉ. एस. एस. लखावत, निदेशक क्षेत्रीय अनुसंधान, डॉ. रविकांत शर्मा, सह निदेशक अनुसंधान तथा विश्वविद्यालय के अन्य वैज्ञानिकों ने भाग लिया।                                                                               

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