उदयपुर,  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 25 सितम्बर 2025 को बांसवाड़ा के नापला दौरे को आदिवासी नेताओं और क्षेत्रीय मांगों की उपेक्षा के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा।

स्थानीय नेताओं ने कहा कि मंच पर किसी आदिवासी नेता को नहीं बैठाया गया, और अपने संबोधन में किसी आदिवासी नेता का नाम भी नहीं लिया गया। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व संसद में श्री मन्नालाल रावत (उदयपुर सांसद), श्री राजकुमार रोत (बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद) और श्री चुन्नीलाल गरासिया (राज्य सभा सांसद) करते हैं।

आलोचकों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की वर्षों पुरानी मांग पर कोई घोषणा नहीं की, न ही डूंगरपुर–बांसवाड़ा रेलवे लाइन के कार्य प्रारंभ करने की कोई सूचना दी, जिसे केंद्र सरकार ने 2013 से रोक रखा है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि जबकि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार आदिवासी हित में दिखाई देती है, वास्तविकता में उनके कार्य आदिवासी विरोधी हैं। बांसवाड़ा दौरा इस बात का स्पष्ट उदाहरण है।

 

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