नई दिल्ली/चंडीगढ़/जयपुर । जयपुर के प्रख्यात आर्किटेक्ट प्रमोद जैन को भारत के वास्तुकला एवं डिजाइन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और जोधपुर स्थित मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर (एमआईसी) के उत्कृष्ट डिजाइन के लिए प्रतिष्ठित ‘आर्किटेक्चर एक्सीलेंस रिकग्निशन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
राज्यसभा सदस्य सतनाम सिंह संधू ने चंडीगढ़ के होटल ताज में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई), चंडीगढ़ की ओर से आयोजित नेशनल आर्किटेक्चर अवार्ड्स के पांचवें संस्करण में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। सम्मान समारोह में देशभर से वास्तुकला और डिजाइन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, पेशेवरों तथा प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।
प्रमोद जैन को यह सम्मान ‘लार्ज सिविक बिल्डिंग्स’ श्रेणी में एमआईसी, जोधपुर के वास्तुशिल्पीय डिजाइन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के लिए चयन काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के पूर्व अध्यक्ष आर्किटेक्ट हबीब खान की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय विशेषज्ञ जूरी ने किया। जूरी ने प्रमोद जैन के डिजाइन दृष्टिकोण, रचनात्मकता, नवाचार और समकालीन भारतीय वास्तुकला में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया।
मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर (एमआईसी), जोधपुर के सांस्कृतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। इसके डिजाइन में आधुनिक वास्तुकला और राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है। इसी कारण एमआईसी का डिजाइन राष्ट्रीय स्तर पर वास्तुकला जगत में चर्चा का विषय रहा है।
पीएचडीसीसीआई के अनुसार, राष्ट्रीय आर्किटेक्चर अवार्ड्स के लिए विभिन्न परियोजनाओं का मूल्यांकन व्यापक 360-डिग्री असेसमेंट के आधार पर किया गया। इसमें डिजाइन कॉन्सेप्ट, समग्र वास्तुशिल्पीय सौंदर्य, नवाचार, स्थायित्व और परियोजना के पूर्ण होने के बाद उसके उपयोग एवं सार्वजनिक स्वीकार्यता जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया।
*पुरस्कारों की श्रृंखला में एक और उपलब्धि*
प्रमोद जैन की यह उपलब्धि उनके लगातार उत्कृष्ट आर्किटेक्चरल कार्य की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्हें 2024 में राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी), जयपुर के डिजाइन के लिए तथा 2025 में मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर (एमआईसी), जोधपुर के लिए लगातार दो वर्षों तक ‘डिजाइनस्केप अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त, उन्हें वर्ष 2025 में एमआईसी, जोधपुर के लिए एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि के साथ नेशनल स्टोन मार्ट अवार्ड भी प्रदान किया गया था। इन सम्मानों ने राजस्थान की समकालीन वास्तुकला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनके योगदान को रेखांकित किया है।
*पांच दशक की रचनात्मक यात्र*
पांच दशकों से अधिक लंबे अपने पेशेवर जीवन में प्रमोद जैन ने अनेक महत्वपूर्ण भवनों और संस्थागत परियोजनाओं की परिकल्पना एवं डिजाइन किया है। उनकी वास्तुकला में स्थानीय परिवेश, भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ, आधुनिक तकनीक और उपयोगिता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है।
जयपुर से अपनी वास्तुशिल्पीय यात्रा को आगे बढ़ाते हुए प्रमोद जैन ने राजस्थान के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके कार्यों ने न केवल सार्वजनिक एवं सांस्कृतिक भवनों की वास्तुकला को नई दृष्टि दी है, बल्कि राजस्थान की स्थापत्य परंपरा को आधुनिक संदर्भों के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
‘आर्किटेक्चर एक्सीलेंस रिकग्निशन अवार्ड’ के रूप में मिला यह सम्मान प्रमोद जैन की पांच दशक से अधिक लंबी रचनात्मक यात्रा और भारतीय वास्तुकला के क्षेत्र में उनके सतत योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर हुई एक और महत्वपूर्ण पहचान है।