-ंउचयमनमोहन कुमार आर्य, देहरादून। श्री वीरेन्द्र कुमार राजपूत जी देहरादून में अपनी पुत्री श्रीमती प्रतिभा सिंह व जामाता के साथ निवास करते हैं। उन्होंने सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद सहित ऋग्वेद के नवम् मण्डल तक सभी मन्त्रों पर काव्यार्थ की रचना की है। उनका अधिकांश कार्य प्रकाशित हो चुका है। वह ऋग्वेद दसवें मण्डल पर काव्यार्थ पूर्ण करने में तत्पर हैं। आशा है कि वर्ष 2026 के मध्य में यह कार्य पूर्ण हो जायेगा। वेदों पर काव्यार्थ के अतिरिक्त भी श्री वीरेन्द्र कुमार राजपूत जी ने अनेक विषयों पर काव्य ग्रन्थों की रचना की है। श्री वीरेन्द्र कुमार राजपूत जी ने भारत पर वर्ष 1962 में चीन द्वारा किए गए आक्रमण के समय 63 वर्ष पूर्व काव्य रचना करना आरम्भ कर दिया था। इस चीनी आक्रमण पर उन्होंने ‘बांध सर कफन चलो’ काव्य रचना की थी। उसके बाद उन्होंने वेद एवं अन्य विषयों पर भी अनेक काव्य रचनायें की हैं। वह सन् 2004 से सामवेद से आरम्भ कर चारों वेदों पर काव्यार्थ की रचना कर रहे हैं और उन्हें प्रकाशित भी कराते हैं। ऋग्वेद के नवम् मण्डल तक उनके काव्यार्थ का प्रकाशन हो चुका है। कवि वीरेन्द्र कुमार राजपूत जी का जन्म 20 नवम्बर, 1939 को जपद बिजनौर, उत्तरप्रदेश के ग्राम -हजयु-हजयेला में पिता श्री उमराव सिंह शेखावत एवं माता श्रीमती मीना वती जी के यहां हुआ था। वह व्यवसाय से सरकारी स्कूल में शिक्षक रहे हैं। आप हिन्दी, इतिहास तथा समाज शास्त्र तीन विषयों में स्नात्कोत्तर उपाधि से अलंकृत हैं। आपने अपने सक्रिय जीवन में अनेक कवि सम्मेलनों में भी भाग लिया है। आपको आर्यसमाज की
संस्थाओं सहित इतर हिन्दी साहित्य से जुड़ी अनेक संस्थाओं ने समय समय पर सम्मानित भी किया है। आपके पुत्र श्री सौरभ कुमार आर्य ओ.एन.जी.सी. में चीफ जनरल मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। आपकी धर्मपत्नी माता सुशीला देवी जी कुछ वर्ष पूर्व दिवंगत हो चुकी हैं। इस समय श्री वीरेन्द्र राजपूत जी 86 वर्ष की आयु पूर्ण करके 87वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। शरीर काफी कमजोर हो गया है। कमर व पीठ भी -हजयुुक गई है। अन्य कुछ रोग भी आपको पीड़ित कर रहे हैं फिर भी आप ऋग्वेद पर काव्यार्थ के कार्य को
पूर्ण करने में पूरी शक्ति से संलग्न एवं तत्पर हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि आप शीघ्र ही ऋग्वेद के अन्तिम दसवें मण्डल का काव्यार्थ भी पूर्ण कर लेंगे और यह आपके जीवनकाल में ही प्रकाशित हो जायेगा।
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