संविधान दिवस पर एक ओर जहाँ देश की राजधानी नई दिल्ली में संविधान दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ,उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला, दोनों सदनों में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी और मल्लिकार्जुन खड़गे तथा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश तथा संसद के दोनों सदनों के सदस्यों को संबोधित किया गया । कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के नौ भाषाओं मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, ओड़िया और असमिया में अनूदित संस्करणों का डिजिटल रूप से विमोचन किया। राष्ट्रपति ने संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन का नेतृत्व भी किया।वही दूसरी ओर राजस्थान विधानसभा में विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की पहल पर एक और नवाचार किया गया है और राज्य विधानसभा भवन के डिजिटल म्यूजियम (राजनैतिक आख्यान संग्रहालय )में बुधवार को नव निर्मित वंदे मातरम दीर्घा का शुभारम्भ किया गया है। विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राज्य के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल तथा जयपुर एवं अजमेर के कानून की शिक्षा ग्रहण कर रहें विद्यार्थियों की उपस्थिति में वंदे मातरम दीर्घा का उद्घाटन किया । इस दीर्घा का निर्माण वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष संविधान दिवस पर विधानसभाध्यक्ष देवनानी की पहल पर विधानसभा के राजनैतिक आख्यान संग्रहालय में संविधान दीर्घा का लोकार्पण किया गया। साथ ही विधान सभा के डिजिटीकरण केआर साथ ही विधानसभा परिसर में कारगिल एक शौर्य वाटिका भी बनाई गई है।
इसके साथ ही देश की विधान सभाओं में राजस्थान विधानसभा कदाचित एक ऐसी अग्रणी विधानसभा बन गई है, जहाँ वंदे मातरम् दीर्घा का निर्माण किया गया है। वंदे मातरम् दीर्घा में विधान सभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की सोच एवं परिकल्पना के अनुरूप राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के ऐतिहासिक पहलुओं को विभिन्न चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। वंदे मातरम दीर्घा में सैंतीस पैनल्स से भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के इतिहास और इससे सम्बन्धित महत्वपूर्ण जानकारियों का समावेश किया गया है।
इस अवसर पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने बताया कि राज्य विधानसभा में बनाई गई इस अनूठी दीर्घा में स्पीकर श्री देवनानी ने बताया कि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखे गए मूल गीत के चित्र सहित विभिन्न जानकारियां आमजन, युवा, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी।संग्रहालय में वंदे मातरम् दीर्घा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना के इतिहास को नई दृष्टि से प्रस्तुत करने वाली एक प्रेरणादायी पहल है। बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने सन् 1875 में अक्षय नवमी के दिन वंदे मातरम गीत को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के लालगोला में लिखा था। यह दीर्घा"वंदे मातरम्' की मूल भावना को केंद्र में रखते हुए स्वदेशी आंदोलन, जन-आंदोलनों तथा क्रांतिकारियों की भूमिका को सजीव रूप में दर्शाती प्रतीत हो रही है। दीर्घा में गीत की मूल पंक्तियों, पांडुलिपि की प्रतिकृति और उस समय के राजनीतिक-सांस्कृतिक परिवेश का सुव्यवस्थित प्रदर्शन किया गया है। इससे आगंतुकों को स्वतंत्रता संग्राम के दौर की भावनाओं का अनुभव हो सकेगा। दीर्घा में वंदे मातरम् के भावपूर्ण संगीत तथा आंदोलन से जुड़े दुर्लभ फोटोग्राफ़, पत्र, भाषण और वीडियो सामग्री भी शामिल की गई है।देवनानी ने बताया कि वंदे मातरम् दीर्घा का उद्देश्य नई पीढ़ी को यह संदेश देना है कि मातृभूमि के प्रति प्रेम, कर्तव्य और संवैधानिक निष्ठा ही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। यह दीर्घा इतिहास, संस्कृति और संसदीय मूल्यों का एक अद्वितीय संगम बनकर राजस्थान विधानसभा की गरिमा को और अधिक समृद्ध करेगी।
विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि राज्य विधानसभा के राजनैतिक आख्यान संग्रहालय के प्रवेश पथ को भी राजस्थान की कला, संस्कृति के अनुरूप भित्ति चित्रों के माध्यम से नये सिरे से तैयार कराया गया है। प्रवेश पथ को राजस्थान के महापुरुषों, कलाकृतियां, लोक कला, लोक नृत्य, राष्ट्रीय पक्षी, राज्य पशु आदि के साथ प्रदेश के पारंपरिक हाथी, घोडे सहित राज्य की कला और संस्कृति को समेटे हुये भित्ति चित्रों के माध्यम से बनाया गया है। देवनानी ने बताया कि वंदे मातरम् दीर्घा का उद्देश्य नई पीढ़ी को यह संदेश देना है कि मातृभूमि के प्रति प्रेम, कर्तव्य और संवैधानिक निष्ठा ही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है। यह दीर्घा इतिहास, संस्कृति और संसदीय मूल्यों का एक अद्वितीय संगम बनकर राजस्थान विधानसभा की गरिमा को और अधिक समृद्ध करेगी।
देवनानी ने इस मौके पर कहा कि वन्दे मातरम् केवल गीत ही नहीं है, यह मातृभूमि के प्रति समर्पण, औपनिवेशिक दमन के विरुध प्रतिरोध और स्वाधीनता की सामूहिक चेतना का प्रभावी प्रतीक है। समय के साथ यह गीत जन सभाओं और सांस्कृतिक आयोजनों में भारत के स्वतन्त्रता संग्राम की प्रेरणा शाक्ति बन गया है।
*संविधान दिवस पर युवा संवाद समारोह*
वंदे मातरम् दीर्घा के लोकार्पण से पहले संविधान दिवस पर राज्य विधानसभा में आयोजित युवा संवाद समारोह को सम्बोधित करते हुए विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है दुनिया में भारत का संविधान ही ऐसा मजबूत संविधान है जिसके माध्यम से देश और प्रदेशों में सत्ता का हस्तान्तरण शांतिपूर्ण तरीके से होता है। भारतीय संविधान की यह सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा आज हम दृढ़ता पूर्वक कह सकते है कि हमारे देश का संविधान पूरी तरह सुरक्षित है और इसे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। देवनानी ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि संविधान भारत की आत्मा, भविष्य और वर्तमान है। देवनानी ने कहा कि संविधान दिवस राष्ट्रीय चेतना को आलौकित करने वाला ऐतिहासिक पर्व है। उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल स्मृति दिवस नहीं है बल्कि जीवंत संकल्प, प्रतिज्ञा और प्रतिबद्धता का दिवस है। यह न्याय, स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्व के मूल्यों को दृढ करने वाला दिवस है। देवनानी ने युवाओं का आव्हान किया कि वे संविधान के मूल्यों को आत्मसात करें। युवा पीढी इसे जीवन शैली में अपनाकर ही संविधान निर्माताओं के प्रति सच्चा नमन कर सकते है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सर्वोपरि है। राष्ट्र है तो हम है। देवनानी ने सभी से अपील की कि वे देश के प्रति विश्वास और श्रद्धा रखे। देश के लिए जिए। अधिकारों को मांगे लेकिन कर्तव्यों के निर्वहन के दायित्व से भी मुँह ना मोडे और पूरी क्षमता के साथ राष्ट्र हित का कार्य करें। भारत विश्व की महान शक्ति और विश्व गुरु है। यह सब भारतीय संविधान के कारण ही सम्भव है।
इस मौके पर राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि संविधान के मूल न्याय की भावना निहित है। हम सभी को मिले एवं न्याय व्यवस्था में विश्वास करें तथा इसका स्वयं पालन करें और फिर दूसरों को कहे आदि बातों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। समारोह में मौजूद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि संविधान की मजबूती बनाने की जिम्मेदारी देश के प्रत्येक नागरिक की है। अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल ने कहा कि संविधान राष्ट्र के लोगों की भावना है।उन्होंने संविधान के सभी चैप्टर्स के साथ दर्शाये गए चित्रों की व्याख्या भी की। विधानसभाध्यक्ष के ज़ेहन में अभी कई और नवाचार है जिन्हें समय रहते सभी के सामने लाया जायेगा ।
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