श्रीगंगानगर, निकटवर्ती लालगढ़ में मिजोरम के लेंगपुई एयरपोर्ट की तर्ज़ पर एयरपोर्ट का निर्माण कर लंबी दूरी की हवाई सेवाओं को शुरू किया जा सकता है। हवाई सेवाओं के शुरू होने से इलाके में पर्यटन, व्यापार व अन्य विकास की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
मिजोरम की राजधानी आइजोल के रेलवे बोर्ड के विजिट टूर से लौटने के बाद जेडआरयूसीसी प.ू सदस्य भीम शर्मा ने बताया कि उनके अनुमान के अनुसार मिजोरम की राजधानी आइजोल का लेंगपुई एयरपोर्ट जितने भू भाग पर बना है लगभग उतना भू भाग लालगढ़ का भी लगता है। विगत दिनों कोलकाता से जब वे इंडिगो की फ्लाइट से लैंगपुई एयरपोर्ट पहुंचे तो फ्लाइट से बाहर आने के बाद चारों ओर नज़र दौड़ाई तो हैरानी हुई। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी जगह पर एयरपोर्ट संचालित हो रहा है यह देखकर हैरानी हो रही है। एयरपोर्ट के लिए लगभग इतनी ज़मीन लालगढ़ में भी लग रही है। यह जानकार भी खुशी हुई कि इस छोटे से एयरपोर्ट से दिल्ली, कोलकाता, सिलचर, गुवहाटी व अन्य स्थानों के लिए फ्लाइट रवाना होती है।
भीम शर्मा ने इस विजिट के बाद इस बात पर जोर दिया है कि जब इतनी छोटी जगह जहां का पूरा क्षेत्र पहाड़ी है वहां से इतनी हवाई उड़ाने है तो हमारे यहां से भी वाया दिल्ली, जयपुर लंबी दूरी की डोमेस्टिक फ्लाइट संचालित क्यों नहीं हो सकती। उच्च स्तर पर इसका एग्जामिन करवाकर हवाई सेवा शुरू के लिए प्रयास शुरू होने चाहिए। वर्तमान समय में समय की बचत के लिए हवाई यात्राओं का चलन काफी बढ़ गया है।
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नेट पर लेंगपुई एयरपोर्ट
लेंगपुई हवाई अड्डे को देश का पहला बड़ा हवाई अड्डा माना जाता है, जिसका निर्माण राज्य सरकार द्वारा किया गया था। लेंगपुई हवाई अड्डे को पूर्वोत्तर क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा होने का गौरव भी प्राप्त है। इस हवाई अड्डे का रनवे 2500 मीटर लंबा है, जो इस मायने में अद्वितीय माना जाता है कि इसके नीचे कई पहाड़ी नदियाँ बहती हैं। इस हवाई अड्डे के निर्माण में 97.92 करोड़ रुपये की लागत आई है। निर्माण प्रक्रिया दो साल और दो महीने के रिकॉर्ड समय में पूरी हुई। इस हवाई अड्डे के निर्माण से पहले, आइज़ोल, बैराबी स्थित निकटतम रेलवे स्टेशन से 130 किमी और सिलचर स्थित निकटतम हवाई अड्डे से 205 किमी दूर था।
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लेंगपुई की तर्ज़ पर बनाया जा सकता है लालगढ़ हवाई अड्डा
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