श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय कला मंदिर की कार्यकारिणी की आम सभा आज संस्था के ऑडिटोरियम चौधरी रामजस सदन में आयोजित हुई, जिसमें वीरेंद्र बैद को उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर निर्वाचित कर लिया।दोबारा अध्यक्ष चुने जाने पर वीरेंद्र बैद का भव्य माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। दोबारा जिम्मेदारी संभालते हुए वीरेंद्र बैद ने कहा कि वे शीघ्र ही नई कार्यकारिणी की घोषणा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी तीन वर्षों के कार्यकाल के दौरान भी संस्था की 75 वर्षों पुरानी परंपरा को न केवल जारी रखा जाएगा, बल्कि उसे और मजबूत बनाया जाएगा। वीरेंद्र बैद ने कहा-गीत, संगीत, नृत्य, नाट्य और ललित कलाओं को प्रोत्साहित करने की राष्ट्रीय कला मंदिर की यात्रा जारी रहेगी। हम नामचीन कलाकारों और हस्तियों को श्रीगंगानगर वासियों से रू-ब-रू करवाने का सिलसिला भी लगातार चलाते रहेंगे, जो इस संस्था की पुरानी परंपरा रही है।उन्होंने उपस्थित सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी उनके पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई।
सभा की शुरुआत में पिछली कार्यवाही की पुष्टि के बाद सचिव राकेश मोंगा ने गत तीन वर्षों में संस्था द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। कोषाध्यक्ष निल्यकांत छाबड़ा ने पिछले तीन वर्षों का आय-व्यय का लेखा-जोखा सभी सदस्यों के समक्ष रखा। इसके बाद
नई कार्यकारिणी के अध्यक्ष पद के लिए संजीव लोहिया ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि पिछले कार्यकाल में वीरेंद्र बैद के नेतृत्व में संस्था ने उल्लेखनीय कार्य किए हैं, इसलिए उन्हें पुनः मौका दिया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव का अनुमोदन बंशीधर जिंदल, एमपी सिंह, सुदर्शन बत्रा, श्रीमती प्रेरणा चितलांगिया सहित अन्य सदस्यों ने किया। इस पर संस्था के मुख्य संरक्षक विजय गोयल और संरक्षक अजय गुप्ता ने सर्वसम्मति से वीरेंद्र बैद को अध्यक्ष पद की घोषणा की।वीरेंद्र बैद शहर की अनेक सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वे एक सक्रिय और प्रतिष्ठित समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते हैं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय कला मंदिर श्रीगंगानगर की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था है। इसी संस्था ने शहर में जन्मे, पले-बढ़े और बाद में विश्वविख्यात गजल सम्राट बन चुके स्वर्गीय जगजीत सिंह की बचपन की गायन प्रतिभा को पहचान दी थी और उन्हें प्रोत्साहित किया था। जगजीतसिंह ने अपनी प्रारंभिक संगीत साधना इसी संस्था से जुड़कर की थी।राष्ट्रीय कला मंदिर पिछले 75 वर्षों से श्रीगंगानगर में गीत-संगीत, नृत्य, नाट्य और ललित कलाओं को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है और शहर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।सभा में सचिव राकेश मोंगा ने सभी सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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वीरेंद्र बैद राष्ट्रीय कला मंदिर के लगातार दूसरी बार सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुने गए
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