श्रम संहिताओं की वापसी और राज्य आतंक का पुरजोर विरोध

श्रीगंगानगर।अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन ने औद्योगिक मजदूरों के हक में एक मजबूत बयान जारी करते हुए न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये सुनिश्चित करने की मांग की है। यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती दुर्गा स्वामी ने आज जारी बयान में कहा कि महंगाई के इस दौर में मजदूरों का वेतन इतना होना चाहिए कि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

उन्होंने कहा कि प्रतिगामी श्रम संहिताओं को पूर्ण रूप से वापस ले लिया जाए क्योंकि ये मजदूर विरोधी हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, फरीदाबाद और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे मजदूर विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में उन्होंने कहा है कि  मजदूर न्यूनतम वेतन में वृद्धि, आठ घंटे की कार्यावधि, ओवरटाइम पर डबल भुगतान, कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की समाप्ति और नई श्रम संहिताओं की वापसी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक मजदूरों पर हो रहे राज्य-प्रायोजित आतंक की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि हरियाणा में आधी रात को छापेमारी और उत्तर प्रदेश में अवैध हिरासत जैसी घटनाओं को शासक वर्ग का मजदूर विरोधी रवैया सामने आ गया है।  अब शासक वर्ग प्रवर्तन विंग बनकर मजदूरों की भावनाओं को तोड़ने का प्रयास कर रहा है।

दुर्गा स्वामी ने कहा कि ने कहा कि नवउदारवादी नीतियां किसानों को बेदखल कर रही हैं और उसी नीतियों के तहत कारखाना मजदूरों को गुलाम बनाए रखा जा रहा है। यूनियन ने मजदूर-किसान एकता को और मजबूत करने का संकल्प लिया है।हरियाणा और उत्तर प्रदेश में हाल में की गई वेतन वृद्धि पूरी तरह अपर्याप्त है। महंगाई के इस समय में 11000 से 15000 रुपये का वेतन परिवार का गुजारा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। नई श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए उन्होंने  चेतावनी दी कि इनके लागू होने से 12-13 घंटे की शिफ्ट और ठेका प्रथा को कानूनी मान्यता मिल जाएगी जो मजदूर शोषण को बढ़ावा देगी। उन्होंने मांग की है कि राज्य आतंक को तत्काल समाप्त किया जाए और सभी गिरफ्तार मजदूर साथियों को बिना शर्त रिहा किया जाए। अखिल भारतीय ग्रामीण एवं खेत मजदूर यूनियन  मजदूरों के अधिकारों की इस लड़ाई में  औद्योगिक साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष जारी रखेगी।

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