श्रीगंगानगर। नगर परिषद के ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थल को लेकर विवाद आज दोपहर बाद और गहरा गया। ग्रामीणों ने सूरतगढ़ मार्ग पर स्थित गांव नरसिंहपुर बारानी में निर्धारित 13 बीघा भूमि पर कचरा पहुंचाने वाले कैंटर और जेसीबी को रोक दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संयंत्र लगाने की बजाय प्रशासन इस जगह को कचरा डंपिंग यार्ड के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।
आज दोपहर को श्रीगंगानगर से कचरे से भरा कैंटर और एक जेसीबी उक्त स्थल की ओर रवाना हुई। गांव की गौशाला के पास से होकर जाने वाले रास्ते पर ग्रामीणों ने पिछले कई दिनों से धरना दिया हुआ था। जैसे ही वाहन पहुंचे, ग्रामीणों ने उनका कड़ा विरोध किया और दोनों वाहनों को रोक लिया।यह सूचना मिलते ही नगर परिषद के अधिशासी अभियंता मंगतराम सेतिया, पदमपुर से उपखंड अधिकारी रणजीतराम, तहसीलदार,नायब तहसीलदार तथा पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। गौरक्षक दल के संयोजक मैसी चौधरी और महेंद्र खोथ के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ बातचीत की।ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जिस रास्ते से कचरा वाहन संयंत्र स्थल तक ले जाए जा रहे थे, वह बुधराम नामक किसान की निजी जमीन है। इस जमीन को आवासीय उपयोग के लिए रूपांतरित किया गया है और सादुलशहर उपखंड अधिकारी ने इस पर स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) जारी कर रखा है। ग्रामीणों ने पूछा-स्टे ऑर्डर वाली जमीन से वाहन कैसे गुजर सकते हैं?इसके अलावा उन्होंने बताया कि नरसिंहपुरा गांव के अंदर से संयंत्र स्थल तक कोई रास्ता नहीं है। चक 22-एमएल के ऊपर से होकर एक वैकल्पिक रास्ता है, जो काफी लंबा है। ग्रामीणों का आरोप है कि नगर परिषद प्रशासन जानबूझकर गौशाला के पास से गुजरने वाले विवादित रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है।
ग्रामीणों ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि जिला प्रशासन ने मात्र 20 दिन पहले 13 बीघा जमीन ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र के लिए निर्धारित की है, लेकिन अभी तक संयंत्र लगा ही नहीं है। फिर भी कचरा लाने की कोशिश क्यों की जा रही है? उन्होंने आशंका जताई कि प्रशासन की मंशा संयंत्र लगाने की नहीं, बल्कि इस जगह को कचरा डंपिंग यार्ड बनाने की है।
कड़े विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन को मजबूरन कचरे से भरा कैंटर और जेसीबी दोनों वाहनों को वापस लौटाना पड़ा।
बता दें कि ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र मूल रूप से श्रीगंगानगर-सूरतगढ़ नेशनल हाईवे-62 पर गांव नेतेवाला में 18 बीघा जमीन पर लगाया जाना था। यहां पर संयंत्र 2016 से प्रस्तावित था। राज्य और केंद्र सरकार की सभी स्वीकृतियां मिल चुकी थीं। केंद्र सरकार ने 78 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था, जिसमें से 18 करोड़ रुपये का टेंडर भी दिल्ली की एक कंपनी को दिया जा चुका था।लेकिन नेतेवाला के ग्रामीणों ने स्वास्थ्य और पर्यावरणीय खतरे का हवाला देते हुए लगातार विरोध किया। करीब 20 दिन पहले विवाद चरम पर पहुंचने के बाद प्रशासन ने नई जगह नरसिंहपुरा बारानी में 13 बीघा जमीन निर्धारित की। आरोप लग रहे हैं कि जिला प्रशासन और नगर परिषद के कुछ अधिकारियों ने एक कॉलोनाइजर के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा है। नेतेवाला में संयंत्र स्थल के पास ही एक कॉलोनी विकसित हो गई है। आरोप है कि कुछ लोगों ने नरसिंहपुरा की जमीन एक किसान से खरीदी, सरकार को संयंत्र के लिए समर्पित कर दी और बदले में नेतेवाला की जमीन हथियाने की कोशिश कर रहे हैं जहां पहले से सभी मंजूरियां मिल चुकी हैं।
वर्तमान में श्रीगंगानगर शहर का कचरा चक 6-जैड़ में बने पुराने डंपिंग यार्ड में डाला जाता था, लेकिन वहां के ग्रामीण भी लंबे समय से विरोध कर रहे हैं और कचरा वाहनों को आने नहीं दे रहे। ऐसे में जिला प्रशासन के सामने अब नया संकट खड़ा हो गया है कि शहर का कचरा आखिर कहां डंप किया जाए।
आज का विरोध प्रदर्शन इस पूरे विवाद को नई दिशा दे गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक वे संयंत्र स्थल पर कचरा नहीं आने देंगे। प्रशासन अब इस जटिल मुद्दे का कोई स्थायी और स्वीकार्य समाधान निकालने में जुटा है।
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नरसिंहपुरा बारानी में ग्रामीणों ने कचरे से लदा कैंटर जेसीबी और नगर परिषद को को बैरंग लौटाया
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