उदयपुर। शहर के कलाकारों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों के मंच 'मोंटाज: ए फोरम फॉर क्रिएटिव एंड क्रिटिकल एंडेवर' (Montage: A Forum for Creative and Critical Endeavour) की 17वीं मासिक बैठक रविवार, 9 अगस्त 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक में सदस्यों ने चित्रकला के पूर्व प्रोफेसर डॉ. रघुनाथ शर्मा के दो उत्कृष्ट चित्रों पर आधारित अपनी एकफ्रास्टिक (Ekphrastic) रचनात्मक प्रतिक्रियाएं प्रस्तुत कीं।
क्या है एकफ्रास्टिक लेखन? एकफ्रास्टिक (Ekphrastic) लेखन साहित्य की वह विधा है जो किसी दृश्य कला (जैसे चित्र, मूर्तिकला, संगीत या वास्तुकला) से प्रेरित होकर, उसका वर्णन करती है या उस पर संवाद स्थापित करती है। यह विधा दृश्य कला और साहित्य के बीच संवाद का माध्यम बनती है।
कलाकृतियों पर विचार और साहित्यिक प्रस्तुतियां डॉ. शर्मा के चित्रों से प्रेरित होकर अधिकांश सदस्यों ने इन्हें देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के सशक्त प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के रूप में व्याख्यायित किया: काव्यात्मक प्रस्तुति: अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार डॉ. शैल चोयल ने इन चित्रों से प्रेरित होकर दो नैतिक संस्मरण साझा किए।
वहीं प्रसिद्ध रंगकर्मी विलास जानवे, आईटी पेशेवर व कवि दक्षेश पनेरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित फ्लैश फिक्शन लेखक डॉ. परितोष चंद्र डुगर ने अपनी प्रतिक्रियाएं भावपूर्ण कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत कीं।
गद्य अभिव्यक्ति: प्रसिद्ध हिंदी लेखिका रेनू देवपुरा, रंगकर्मी मनीष शर्मा, गृहणी मंजू डुगर, अंग्रेजी की प्रोफेसर डॉ. मनीषा शेखावत और दिल्ली पब्लिक स्कूल के छात्र हिमांज़य डुगर ने अपने विचार गद्य के रूप में व्यक्त किए।
उपस्थिति एवं संचालन बैठक में वरिष्ठ चित्रकार आकाश चोयल, शोधार्थी (भौतिक शास्त्र) हर्षवर्धन शर्मा, किरण जानवे और गगनजय सहित अन्य प्रबुद्ध सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक की अध्यक्षता विलास जानवे ने की तथा संचालन दक्षेश पनेरी द्वारा किया गया। सत्र के अंत में डॉ. रघुनाथ शर्मा ने सभी साहित्यिक प्रतिक्रियाओं पर अपनी टिप्पणी दी और अपनी कलाकृतियों के सृजन की पृष्ठभूमि के बारे में बताया। कार्यक्रम का समापन मोंटाज के संस्थापक डॉ. परितोष चंद्र डुगर द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।