कोटा। आमजन को घर के नजदीक सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लोकसभा अध्यक्ष एवं कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला की प्रेरणा से शुरू किए गए जनसेवा शिविर पहले ही दिन अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ते नजर आए।
वार्ड 13, 15, 39 और 40 के लिए आयोजित शिविर में न जिम्मेदार अधिकारी नजर आए और न ही पार्षद। हालात ऐसे रहे कि बैठने के लिए किराए पर मंगवाई गई 84 कुर्सियां दिनभर खाली पड़ी रहीं और पूरे दिन में जन्म प्रमाण-पत्र के लिए मात्र एक आवेदन आया।
जनसेवा के बड़े-बड़े दावों के बीच शिविर की यह तस्वीर व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर गई।
84 कुर्सियां खाली, जनता के इंतजार में बीता दिन!
भीमगंजमंडी स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में आयोजित शिविर में आमजन की समस्याओं का समाधान करने और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन पहले ही दिन शिविर में सन्नाटा पसरा रहा। बैठने के लिए लगाई गई 84 कुर्सियां खाली रहीं। कामकाज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे दिन में जन्म प्रमाण-पत्र का मात्र एक आवेदन लेने के लिए व्यक्ति पहुंचा।
समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर शिविर स्थल पहुंचे लोगों को अधिकारियों की अनुपस्थिति और अव्यवस्थाओं के चलते निराश होकर लौटना पड़ा।
जिम्मेदार अधिकारी गायब, जमादार के भरोसे जनसेवा!
शिविर का उद्देश्य जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र, आधार सेवा और अन्य सरकारी सुविधाएं वार्ड स्तर पर उपलब्ध कराना था, ताकि लोगों को नगर निगम और अन्य कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। लेकिन पहले दिन व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी वार्ड जमादार के भरोसे नजर आई।
जिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में आमजन की समस्याओं का समाधान होना चाहिए था, वे ही मौके पर दिखाई नहीं दिए। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब शिविर में जिम्मेदार अधिकारी और पार्षद ही मौजूद नहीं होंगे, तो आमजन की समस्याओं का समाधान आखिर कौन करेगा?
प्रचार-प्रसार खूब, धरातल पर जनसेवा बेअसर!
नगर निगम कोटा की ओर से शहर के 100 वार्डों को 12 क्लस्टर में बांटकर विभिन्न विद्यालयों में जनसेवा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शिविर 26, 28 और 30 सितंबर 2026 को सुबह 10 से शाम 5 बजे तक आयोजित होने हैं। इनमें जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र, आधार सेवा सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
लेकिन पहले ही दिन वार्ड 13, 15, 39 और 40 के शिविरों में सामने आई स्थिति ने व्यवस्थाओं और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब शिविर में न अधिकारी पहुंचे, न जनप्रतिनिधि और न ही आमजन के काम हुए, तो इस आयोजन का लाभ जनता को कैसे मिलेगा?
पूर्व पार्षद सुनील शर्मा ने उठाए सवाल पूर्व वार्ड पार्षद सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि शिविर के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिविरों में केवल जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र तक ही काम सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आमजन के अन्य जरूरी कार्य भी किए जाने चाहिए, ताकि लोगों को वास्तविक राहत मिल सके।
अब सवाल यह है कि आगामी शिविरों में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करेंगे या फिर जनसेवा के नाम पर जनता को इसी तरह निराश होकर लौटना पड़ेगा?