महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक मात्स्यकी महाविद्यालय, उदयपुर मे सोमवार को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ एल.एन. महावर ने कहा कि हमारे देश मे हिन्दी जन -जन की समृद्ध भाषा है और भारतीय संस्कृति को एक सूत्र मे समेटे है।

हमे हिंदी बोलने मे गर्व का अनुभव होना चाहिये। हिन्दी भाषा से व्यक्ति शिक्षण कार्य के साथ अपना जीवन हिन्दी साहित्य, कविता, दौहे, निबन्ध, गद्यांश से अपने आपको राजकीय एवं गैर राजकीय कार्य करते हुए उपाधि प्राप्त कर रोजगार सृजन करता है।

हिन्दी आलेख, कविता पाठ द्वारा राष्ट्रीय मुदद्ो पर सरकार एवं जनता को जागरूक कर सकता है।

हिन्दी दिवस के इतिहास और महत्व पर प्रकाश ड़ालते हुऐ डॉ. महावर ने बताया कि हमारे देश की राजभाषा हिन्दी है और हमारी मातृ भाषा भी हिन्दी ही है।

इसके साथ ही बताया की 14 सितंबर 1949 को लंबे विचार-विमर्श के बाद हिंदी को भारत सरकार द्वारा देवनागरी लिपि को राजभाषा बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।

इसी दिन हिंदी के पुरोधा व्यौहार राजेंद्र सिंह प्रमुख हिन्दी साहित्यकार का 50वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिंदी को देश की राजभाषा बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

कार्यक्रम मे विद्यार्थियों का मनोबल बढाते हुए डॉ. एम.एल. औझा, सह-प्राध्यापक ने दैनिक जीवन मे हिन्दी के प्रयोग की बात कही एवं दैनिक जीवन मे हिंदी को अपनी मात्र भाषा के अनुरूप आदर व सम्मान देने और अपनाने की सलाह दी।

इस अवसर पर महाविद्यालय के शैक्षणोत्तर कर्मचारी सुश्री आरती वर्मा, प्रभुलाल, बाबूलाल, जितेन्द्र, प्रकाश उपस्थित थे।

महाविद्यालय के विद्यार्थियों में छात्रा विद्या बंजारा द्वारा राष्ट्र भक्ति के लिए कुछ पंक्तियाँ प्रस्तुत की इसके अलावा गौरव कुमावत द्वारा हिन्दी दिवस की पृष्ठभूमी पर प्रकाश डाला।

अन्य छात्र छात्रओं में सीमा, प्रियंका, यशस्वी, रवीना, विक्रम, दीपक, साहिल, मोहित और हर्षित तेली आदि ने हिंदी के महत्व पर अपने विचार प्रकट किऐ।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. एम.एल. औझा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापन दिया