कोटा। राजस्थानी भाषा के सुप्रसिद्ध गीतकार एवं श्रृंगार रस के सिरमौर कवि ‘गीतऋषि’ दुर्गादान सिंह गौड़ के आकस्मिक निधन पर भारतेंदु हरिश्चंद्र साहित्य समिति, कोटा की ओर से रंगीतिका संस्था के संयोजन में 21 अगस्त को माहेश्वरी भवन में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।
सभा में शहर के साहित्यकारों, कवियों, साहित्यप्रेमियों, गणमान्य नागरिकों तथा विभिन्न सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक अवदान को याद किया।
माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा दुर्गादान सिंह गौड़ का निधन राजस्थान के गीत-साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि कॉलेज जीवन से ही उनका कवि गौड़ से आत्मीय संपर्क रहा। उनकी रचनाओं में राजस्थान की माटी, संवेदना और जीवन के विविध रंगों की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती थी।
राष्ट्रीय कवि जगदीश सोलंकी ने उनके व्यक्तित्व, साहित्यिक यात्रा और रचनात्मक विशेषताओं को याद करते हुए उनकी कविताओं से जुड़े अनेक प्रसंग साझा किए। उन्होंने कहा कि गौड़ की रचनाओं की सहजता, भावप्रवणता और गीतात्मकता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। कवि मुकट मणिराज ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से जानकारी देते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
जितेंद्र निर्मोही, रामेश्वर शर्मा रामू भैया, बृजेंद्र कौशिक आदि वक्ताओं ने कहा कि दुर्गादान सिंह गौड़ की कविताओं और गीतों में श्रृंगार की आदर्श स्थिति के साथ दर्द, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। भाव और शिल्प-सौंदर्य के साथ भावानुकूल लय एवं धुनों ने उन्हें राजस्थान के गीतकारों में विशिष्ट और सर्वोच्च स्थान दिलाया।
श्रद्धांजलि सभा में कोटा दशहरा मेले के दौरान कवि दुर्गादान सिंह गौड़ की स्मृति में स्थायी साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने का विचार भी सामने आया। उनके पुत्र निशामुनि गौड़ ने कहा कि वे अपने पिता की अधूरी साहित्यिक कृतियों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। अंत में भारतेंदु समिति के महामंत्री सुनील जायसवाल ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
भारतेंदु समिति के अध्यक्ष हरिकृष्ण बिरला, पंकज मेहता, रविन्द्र त्यागी महेंद्र नेह, शिवराज सिंह गौड़, सिद्धार्थ सिंह, रविंद्र सिंह, इंदु सिंह, भारतेंदु समिति के महामंत्री सुनील जायसवाल, महेश अजमेरा, सुरेश काबरा, श्रीमती स्नेह लता, प्रभात कुमार सिंघल, अरुण भार्गव, भगवती प्रसाद गौतम सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नहुष व्यास ने किया।