उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं शांतिपीठ संस्थान, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर "अलग परिस्थितियाँ, समान आकांक्षाएँ' विषय पर एक प्रेरणादायी एवं विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा, आकांक्षाओं और सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को सकारात्मक दिशा देने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने की। इस अवसर पर कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा तथा शांतिपीठ संस्थान के संस्थापक श्री अनंत गणेश त्रिवेदी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

श्री अनंत गणेश त्रिवेदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक युवा की परिस्थितियाँ भले ही अलग हों, लेकिन बेहतर भविष्य, सम्मानजनक जीवन और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की आकांक्षा सभी युवाओं में समान होती है।

उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति यदि सकारात्मक सोच, अनुशासन, संवेदनशीलता और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़े तो वह समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि मेवाड़ की शौर्य, त्याग और आध्यात्मिक परम्परा से प्रेरणा लेकर वर्तमान की पर्यावरण विघटन और अशान्ति के माहौल की चुनौती को स्वीकार करते हुए आगे बढना चाहिए।

कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि युवा केवल देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान के परिवर्तनकारी नेतृत्व की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, कौशल और ऊर्जा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र की बेहतरी के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने तथा चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा का विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान विभाग सहित अन्य विभागों के विद्यार्थियों से उनकी आकांक्षाओं, समस्याओं, विचारों एवं भविष्य की योजनाओं के संबंध में बातचीत की और उनके मन की बात जानी। इस आत्मीय संवाद ने विद्यार्थियों को अपनी बात सीधे विश्वविद्यालय के कुलगुरु के समक्ष रखने का अवसर प्रदान किया।

कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा ने युवाओं की बहुआयामी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को शिक्षा और रोजगार के साथ-साथ सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति भी संवेदनशील होना आवश्यक है। उन्होंने व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को युवा विकास का अभिन्न हिस्सा बताया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में पर्यावरण विज्ञान विभाग की इंचार्ज हेड डॉ. अनुया वर्मा ने सभी अतिथियों का आत्मीय एवं गरिमापूर्ण स्वागत किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं को उचित मार्गदर्शन, अवसर और सकारात्मक वातावरण प्रदान करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को समय की आवश्यकता बताया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. गिरिराज सिंह चौहान, श्री दिनेश कोठारी एवं डॉ. कुंजन आचार्य सहित अन्य शिक्षक एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। शांतिपीठ संस्थान की ओर से डॉ के एस राठौड़, जयश्री सिंह, राजकुमार मेनारिया एवं राजनंदिनी मेनारिया, मानसी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। पर्यावरण विज्ञान विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में सहभागी बने।

इस अवसर पर डॉ. देवेन्द्र सिंह राठौड़ ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की थीम को पर्यावरणीय संदर्भों से जोड़ते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, जल संकट, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सतत विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि 'अलग परिस्थितियाँ, समान आकांक्षाएँ" की भावना युवाओं को यह समझने का अवसर देती है कि सामाजिक, आर्थिक एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ भले ही अलग हों, लेकिन एक सुरक्षित, स्वस्थ, समावेशी एवं सतत भविष्य की आकांक्षा सभी की समान है।

उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

बी एन विश्वविद्यालय के डॉ. कमल सिंह राठौड़ ने युवाओं से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने तथा अपने दैनिक जीवन में प्रकृति संरक्षण की आदतों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और विशेष रूप से युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।

कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन डॉ. सोनिका जैन ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करते हुए अतिथियों एवं विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद का वातावरण निर्मित किया।

कार्यक्रम के दौरान युवाओं में सकारात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, पर्यावरणीय चेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की भावना विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी भिन्न क्यों न हों, युवाओं के सपने और आकांक्षाएँ एक बेहतर भविष्य से जुड़ी होती हैं।

सही मार्गदर्शन, सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से युवा अपनी आकांक्षाओं को उपलब्धियों में बदल सकते हैं और समाज में सार्थक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं।

अंत में कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस का यह आयोजन युवाओं को प्रेरणा देने, उनके विचारों को मंच प्रदान करने तथा पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास के प्रति उनकी भूमिका को रेखांकित करने वाला एक सार्थक, प्रेरणादायी एवं प्रभावशाली आयोजन रहा।