जैसलमेर । राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर द्वारा प्रवर्तित योजना रालसा (लीगल सर्विसेज फॉर विक्टिम्स ऑफ साइबर क्राइम) योजना, 2026 के निर्देशों की अनुपालना में जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ओमी पुरोहित के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ललित पुरोहित ने बैंक, नगर परिषद, विद्युत विभाग, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं अन्य वित्तीय संस्थाओं के अधिकारियांे के साथ एडीआर भवन में बैठक आयोजित की।

बैठक में विभिन्न बैंकों के बैंकर्स व अन्य विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में उपस्थित अधिकारीगण को सचिव ने बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर एवं गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा साइबर क्राइम संबंधित अपराधों हेतु छब्त्च्.ब्थ्ब्थ्त्डै च्वतजंसए कस्टडी, पैसे के रेस्टोरेशन एवं शिकायत निवारण हेतु मानक संचालन प्रकिया (ैव्च्) तैयार की है।

इस ैव्च् को तैयार करने मुख्य उद्देश्य ‘‘वित्तीय धोखधड़ी के मामलों में पुलिस, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के लिए एक समान प्रक्रिया निर्धारित करना और ठगी की राशि को शीघ्र सुरिक्षत कर पीड़ित को वापस दिलाने की व्यवस्था करना है।’’

उन्होंने बैंकर्स को यह भी बताया कि ैव्च् के अनुसार बैंकों का दायित्व है कि साइबर क्राइम की सूचना प्राप्त होते ही उस पैसे पर होल्ड लगाना, संबंधित लेन-देन की जानकारी सुरक्षित रखना, खाते के वास्तविक धारक की पहचान करने के लिए सही ज्ञल्ब् जानकारी लेना, बैंक द्वारा शिकायत के संबंध में की गई कार्रवाई को ब्थ्ब्थ्त्डै पोर्टल पर अपडेट करना एवं खातें और ग्राहक संबंधित जानकारी केवल अधिकृत/कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही साझा करना है। यदि किसी निर्दाेष व्यक्ति का खाता गलत तरीके से प्रभावित हो जाता है, तो उसके लिए शिकायत निवारण की व्यवस्था करना।

सचिव ने बैंकर्स को नालसा विधिक सहायता हेल्पलाईन नंबर 15100, साइबर क्राइम हेल्पलाईन नंबर 1930 एवं छब्त्च् च्वतजंस के अधिकाधिक प्रचार-प्रसार करने को प्रेरित किया।