नई दिल्ली/बीकानेर। केन्द्रीय क़ानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने साहित्यकारों और लेखकों से आह्वान किया है कि वे ऐसा साहित्य सृजित करें, जो देश की जनता के मन में राष्ट्रप्रेम, त्याग और स्वाभिमान की भावना को जागृत करे तथा समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास की चेतना को सुदृढ़ बनाए।

केन्द्रीय मंत्री मेघवाल ने यह विचार नई दिल्ली के अकबर रोड स्थित गर्वी गुजरात भवन में भारतीय भाषा और साहित्य संगम और वीणा म्यूजिक द्वारा विश्व पुस्तक मेला में भाग लेने आए लेखकों और साहित्यकारों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने प्रख्यात लोकगायिका और पद्मश्री सम्मानित मालिनी अवस्थी के लोकगीत को अपनी आवाज में सुनाते हुए कहाकि उन्होंने जिस प्रकार अपने गीतों और रचनाओं के माध्यम से देश प्रेम की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है। इसी प्रकार लेखक और साहित्यकार भी अपनी रचनाओं का सृजन करे।मेघवाल ने कहा कि सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में साहित्य की भूमिका अनिवार्य है। जब लेखनी राष्ट्रहित से जुड़ती है, तब वह केवल शब्द नहीं रह जाती, बल्कि समाज और देश को आगे बढ़ाने की शक्ति बन जाती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्य उसके साहित्य में प्रतिबिंबित होते हैं। जब लेखक और साहित्यकार अपने लेखन के माध्यम से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देते हैं, तब वह समाज के हर वर्ग को जोड़ने का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाला प्रभावशाली माध्यम है।मेघवाल ने कहा कि भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। साहित्यकार अपनी लेखनी से भाषा, जाति, क्षेत्र और वर्ग की सीमाओं को पार कर लोगों को एक साझा राष्ट्रीय चेतना से जोड़ सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज आवश्यकता है ऐसे साहित्य की, जो युवाओं को प्रेरित करे, उन्हें अपने देश की संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जोड़े तथा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित करे।
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश प्रेम केवल नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वह विचार, व्यवहार और रचनात्मक अभिव्यक्ति में भी दिखाई देना चाहिए। लेखक यदि अपने साहित्य में त्याग, सेवा, ईमानदारी और आत्मसम्मान जैसे मूल्यों को स्थान देते हैं तो उसका गहरा प्रभाव समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच और विकासोन्मुख दृष्टिकोण से लिखा गया साहित्य समाज में आशा और विश्वास का संचार करता है।केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है, तब साहित्यकारों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में फैली निराशा, हिंसा और नकारात्मकता के स्थान पर सद्भाव, संवाद और समाधान का मार्ग दिखा सकते हैं। साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ उसे बेहतर दिशा देने वाला पथप्रदर्शक भी है।
उन्होंने कहा कि सरकार साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न साहित्यिक मंचों और आयोजनों के माध्यम से लेखकों को अपनी बात समाज तक पहुंचाने के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे इन अवसरों का उपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। मेघवाल ने कहा कि राजस्थानी भाषा का जिक्र करते हुए कहा कि यह बहुत मीठी और सरल है और दुनिया भर में बसे प्रवासी राजस्थानियों द्वारा बोली जाती है। उन्होंने बताया कि संस्कृति पुरुष और वीणा संगीत के संस्थापक के सी मालू ने राजस्थानी लोकगीतों और संगीत के माध्यम से समाज को शिक्षित करने तथा साँस्कृतिक चेतना जागृत करके का अविस्मरणीय काम किया है।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में भारतीय भाषा और साहित्य संगम जयपुर के संरक्षक हेमजीत मालू ने । संस्था के अध्यक्ष डॉ कुमेश कुमार जैन रायपुर (छत्तीसगढ़) ने सभी अतिथियों का स्वागत किया । संस्था के वरिष्ठ सलाहकार पुरुषोत्तम दिवाकर ने केन्द्रीय मंत्री मेघवाल के प्रेरक भाषण के लिए उनका आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर दूरदर्शन के निदेशक अखिलेश शर्मा सहित कई जाने माने साहित्यकार गण उपस्थित थे ।
लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला से भेंट
भारतीय भाषा और साहित्य संगम जयपुर के प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला से शिष्टाचार भेंट की और उन्हें संस्था की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी ।
संस्था के प्रतिनिधिमंडल ने अपने तीन दिवसीय दिल्ली प्रवास में प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेला के विभिन्न स्टालों का विहंगम अवलोकन किया और नेशनल बुक स्टॉल के पदाधिकारियों , प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार और पीयूष कुमार सहित अन्य प्रकाशनों के प्रतिनिधियों से भेंट की।
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