बांसवाड़ा। इस्कॉन बांसवाड़ा द्वारा भगवान् जगन्नाथ,श्री बलभद्र जी, ओर माता सुभद्रा को श्रृंगारित सुसज्जित रथ में विराजित कर नगर भ्रमण कराया गया जिसमें देशी विदेशी रशियन साधक साधिकाएं श्रद्धालु द्वारा कृष्ण संकीर्तन भजन में झूमने को मजबूर हो गए।
प्रारम्भ में आज़ाद चौक जगदीश मन्दिर से ठीक चार बजे रथ यात्रा अभिनंदन निमाई दास, अभय गौरांग दास एवम् विश्व आत्मा दास की अगुवाई में प्रारम्भ हुई।
साधिका श्रीमति रचना अरुण व्यास ने बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा संकीर्तन भजन करते हुए रथ को हाथों से खींचने से पूर्व महिला साधिकाओं ने चरण वंदना दासी और साधिका दीपाली भट्ट की अगुवाई में सुनहरे झाड़ू से बूहारती हुई भजन ओर हरे रामा हरे कृष्ण भावनामृत भक्ति साधना युक्त होकर भजन कीर्तन कर रही थी
वही पुरुष साधक कुशाग्र निमाई दास की अगुवाई में छबीलो द्वारा सड़क को धो रहे थे।
*पहली बार देशी विदेशी रशियन पर्यटक साधक साधिकाओं ने संकीर्तन में समा बाँध दिया*
श्रद्धालु अरुण एस व्यास ने बताया कि पहली बार देशी विदेशी रशियन साधक बाल गोपाल प्रभु , जगत गुरु प्रभु
करुणेश्वरी माताजी के सानिध्य में साधिकाओं श्रद्धालुओं ने जनजाति टीएसपी परिक्षेत्र वागड़ बांसवाड़ा की संस्कृति को नया आयाम दिया ओर उदयपुर,रतलाम,अहमदाबाद सहित गुजरात मध्यप्रदेश के इस्कॉन साधक भी बड़ी संख्या में बांसवाड़ा की अदभुत यात्रा में सम्मिलित हुए।
जगह जगह सर्व समाज की ओर से जगन्नाथ स्वामी श्रीबल भद्र जी माता सुभद्रा जी की रथ यात्रा का स्वागत करते हुए पेयजल वॉटर केन, अल्पाहार प्रसादी ओर आरती अभिषेक पूजा विधान माल्यार्पण श्रीफल भेंट किया गया
*प्रशासनिक व्यवस्था चाक चौबंद, पुलिस जगह जगह मुस्तैद रही*
जगन्नाथ रथ यात्रा मार्ग में जगह जगह धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए जबकि इस्कॉन केन्द्र बांसवाड़ा के साधकों ने मध्य रात्रि मार्ग की साफ सफ़ाई, पेयजल,अल्पाहार प्रसादी, लाईट सुनिश्चित की यात्रा मार्ग में जहां भी अंधेरा था निकटवर्ती सर्व समाज को आग्रह करते व्यवस्था की।
*सर्व समाज की 31 समितियों ने कड़ी मेहनत कर के व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जिनका यात्रा मार्ग में ही पगड़ी पहना कर शाल ओढ़ाकर माल्यार्पण श्रीफल, कुमकुम अक्षत से बहुमान किया गया।*
इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान में कृपाली भट्ट, नीरज पाठक , कुशल, डिम्पल , सुनील , सुरेश , नैमिष , अक्षी, शाबुनी मंडल, दीपिका ,विभा , अर्चना, अनिता,भारती,चैतन्य,खुशी, त्रिवेदी, चरण वंदना दासी, श्रीमति रचना व्यास, मानस पंड्या, कुशाग्र, ओड्रिला, शिल्पा,शुभम,वारिश,वंशी,शोभा, हीक्षिता ,अरुण व्यास सहित बड़ी संख्या में साधक साधिकाएं श्रद्धालु शामिल रहे।