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जगन्नाथ रथ यात्रा

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19 Jul 26
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जगन्नाथ रथ यात्रा

जगन्नाथ रथ यात्रा एक ऐसा महापर्व है जो पूरे भारत में श्रद्धा और उत्साह का केंद्र है।

देश भर में जगह -जगह उड़ीसा के पुरी शहर सहित लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं।

 आषाढ़ माह की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा संग रथ में सवार होकर अपनी मौसी गुंडिचा माता के मंदिर जाते हैं, जिसे उनका मासी का घर माना जाता है।

वहां वे सात दिन विश्राम करते हैं और फिर लौटकर पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर आते हैं।

 कहा जाता है कि रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ 15 दिनों तक ज्वर से पीड़ित रहते हैं, इसलिए मंदिर के पट इस अवधि में बंद रहते हैं। 

जब वे स्वस्थ होते हैं तो अपनी मौसी के घर सैर करने रथ में सवार होकर जाते हैं।

जब भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी माता गुंडिचा के मंदिर पहुंचते हैं, तो माता गुंडिचा उनका विशेष पकवानों से स्वागत करती हैं। 

इन व्यंजनों में खासतौर से पिठादो और रसगुल्ला शामिल होते हैं।

भगवान जगन्नाथ जब अपनी मौसी माता गुंडिचा के पास पहुंचते हैं तो माता गुंडिचा माता उन्हें कई तरह के पकवानों को खिलाती हैं।

 जिसमें कि खासकर पिठादो और रसगुल्ला शामिल है. माना जाता है कि आज भी भगवान इस पिठादो और रसगुल्ला को खाकर बहुत प्रसन्न होते हैं।

हर साल भगवान के पहुंचने पर इस मंदिर में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं और भगवान जगन्नाथ का स्वागत किया जाता है।
 


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