प्रतिवर्ष 8 मार्च का दिन संपूर्ण विश्व में महिलाओं के सम्मान, उनकी उपलब्धियों और समाज में उनके अद्वितीय योगदान को समर्पित होता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का यह दिन केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस और शक्ति को नमन करने का है, जिसे हम 'नारी' कहते हैं। भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष व कर्मा संस्थान जिला अध्यक्ष अनीता चौहान ने बताया कि 'नारी: सृष्टि का आधार'
भारतीय संस्कृति में कहा गया है— "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:" अर्थात जहाँ नारियों की पूजा (सम्मान) होती है, वहाँ देवताओं का निवास होता है। एक महिला केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था है। वह माँ के रूप में संस्कार देती है, बहन के रूप में प्रेम, पत्नी के रूप में साथ और बेटी के रूप में खुशियाँ बिखेरती है।
आज की बदलती तस्वीर
आज की नारी अब अबला नहीं, बल्कि 'सशक्त और सबला' है। वह घर की चौखट लांघकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छू रही है। चाहे वह विज्ञान का क्षेत्र हो, राजनीति हो, खेल का मैदान हो या सरहद पर देश की रक्षा— महिलाओं ने अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है।
* कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स ने आसमान नापा।
* मैरी कॉम और पी.वी. सिंधु ने तिरंगा लहराया।
* लता मंगेशकर और महादेवी वर्मा ने कला और साहित्य को समृद्ध किया।
चुनौतियाँ और हमारा संकल्प
इतनी प्रगति के बावजूद, आज भी हमारे समाज में कुछ कुरीतियाँ और असमानताएँ मौजूद हैं। महिला दिवस की सार्थकता तभी है जब:
* हम कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराइयों को जड़ से मिटाएँ।
* हर बेटी को शिक्षा और स्वावलंबन का समान अवसर दें।
* समाज में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करें।
> "कोमल है, कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है,
> जग को जीवन देने वाली, मौत भी तुझसे हारी है।"
अंत में, मैं यही कहना चाहूँगी कि महिला सशक्तीकरण केवल नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी शुरुआत हमारे अपने घर से होनी चाहिए। जब हम अपनी माँ, बहन और पत्नी के सपनों को पंख देंगे, तभी हमारा समाज और देश वास्तव में उन्नति करेगा। आज इस महिला दिवस पर हम संकल्प लें कि हम महिलाओं का सदैव सम्मान करेंगे और उनके मार्ग की बाधाओं को दूर करने में अपना योगदान देंगे।