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बायर ने भारतीय किसानों के साथ अपने फिजिटल कनेक्शन को किया मजबूत, 50 लाख यूजर्स तक पहुंचा ‘फार्मराइज एप’

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12 May 26
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बायर ने भारतीय किसानों के साथ अपने फिजिटल कनेक्शन को किया मजबूत, 50 लाख यूजर्स तक पहुंचा ‘फार्मराइज एप’

नई दिल्ली | बायर ने भारतीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म फार्मराइज के माध्यम से फिजिटल इकोसिस्टम के विस्तार की घोषणा की है। इस विस्तार को परामर्श, बीमा, क्रेडिट, बाजार तक पहुंच और पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रियाओं से जुड़ी डिजिटल पहल डायरेक्ट-टू-फार्मर (डी2एफ) के बढ़ते पोर्टफोलियो से सपोर्ट मिला है।

फार्मराइज भारत के सबसे प्रभावी एग्री-टेक प्लेटफॉर्म में से एक के रूप में उभरा है। देशभर में इससे 50 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। किसानों की वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस मोबाइल एप के माध्यम से एक साधारण इंटरफेस के जरिये कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़े परामर्श, स्थानीय मौसम से जुड़े अपडेट, मंडी की कीमतों व सरकारी योजनाओं की जानकारी और फसल से संबंधित कंटेंट उपलब्ध कराए जाते हैं। यह प्लेटफॉर्म हिंदी, मराठी, तमिल और तेलुगु सहित नौ से ज्यादा भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसका डिजाइन इस तरह से किया गया है कि स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे किसान भी इसका आसानी से प्रयोग कर सकते हैं।

फार्मराइज समय से भरोसेमंद जानकारियां किसानों तक पहुंचाता है और किसानों की खेती संबंधित निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाता है।  

टेक्नोलॉजी जिसने भरोसा दिया और परिणाम दिखाए

फार्मराइज का महत्वपूर्ण फीचर है इसकी एंटी-काउंटरफीट (एसीएफ) स्कैनिंग क्षमता। इसके माध्यम से किसान सीधे एप की मदद से किसी उत्पाद की प्रामाणिकता को जांच सकते हैं। अब तक इस फीचर के माध्यम से 1 करोड़ से ज्यादा स्कैन किए गए हैं। इससे उत्पादों से जुड़ी सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है और उत्पाद संबंधित सही जानकारी पर भरोसा मजबूत हुआ है।

फार्मराइज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से किसानों की खेती से संबंधित बेहतरीन जानकारी देने में सक्षम है। 2025 में लॉन्च किए गए इन-हाउस डेवलप्ड एआई-पावर्ड चैटबोट की मदद से फसल से लेकर खेत से संबंधित सवालों के जवाब तुरंत और आसान भाषा में मिलते हैं। इससे सामान्य पूछताछ के लिए फिजिकल टचपॉइंट पर निर्भरता कम हुई है। अब तक चैटबोट ने किसानों के 25 हजार सवालों के जवाब दिए हैं। इसकी मदद से कभी भी और कहीं भी विशेषज्ञ दिशानिर्देश पाना संभव हुआ है।

पिछले 18 महीने में फार्मराइज की इंस्टॉलेशन तेजी से बढ़ी है। साथ ही हर महीने एक्टिव यूजर्स की संख्या और फीचर्स का उपयोग भी बढ़ रहा है। यह इसकी प्रासंगिकता और किसानों से जुड़ाव को दिखाता है।

 

व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम

प्रमुख एंगेजमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर रहा फार्मराइज एक बड़े डायरेक्ट2फार्मर (डी2एफ) इकोसिस्टम का हिस्सा है। इसे अपनी पूरी वैल्यू चेन में किसानों की विविध जरूरतों को देखते हुए बायर ने तैयार किया है।

इसमें डिजिटल मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म फार्मराइज वन भी शामिल है। इसे 500 से ज्यादा किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और 2,00,000 से ज्यादा किसानों को सपोर्ट कर रहे ऑन-ग्राउंड ऑपरेशंस के साथ इंटीग्रेट किया गया है। इससे बायर और इसके नेटवर्क पार्टनर्स के एग्री इनपुट, विभिन्न ऋणदाताओं की तरफ से क्रेडिट और प्रीमियम खरीदारों से सीधे मार्केट लिंकेज की सुविधा मिलती है। इससे किसानों को अपने उत्पादों के लिए सर्वश्रेष्ठ संभव कीमत मिलती है और एफपीओ बेहतर मार्जिन पाते हैं।

बायर ने डिजिटल प्लेटफॉर्म एलिवियो भी लॉन्च किया है, जो हाई रेजॉल्यूशन सेटेलाइट डाटा का प्रयोग करके किसानों को प्लॉट-बेस्ड डाटा एवं इनसाइट्स देता है और मौसम की अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए छोटे किसानों को प्लॉट-लेवल रिस्क प्रोटेक्शन देता है। एलिवियो किसी तरह का नुकसान होने पर तुरंत बेनिफिट प्रदान करता है। किसान तुरंत ही किसी नजदीकी बायर रिटेलर के पास जाकर उस बेनिफिट के बदले में बीज या फसल की सुरक्षा से संबंधित अन्य उत्पाद खरीद सकते हैं। इस समय प्याज और मक्का जैसी चुनिंदा फसलों के लिए यह सुविधा उपलब्ध है। जल्द ही इसे अन्य फसलों के लिए भी उपलब्ध कराया जाएगा। इनके साथ-साथ आस्क दीना वाट्सएप चैटबोट भी लॉन्च किया गया है, जो डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) के क्षेत्र में बायर के काम को सपोर्ट करता है। यह काम ‘डायरेक्टएकर्स’ की मदद से किया जाता है। इसके माध्यम से किसानों को धान की खेती के लिए पर्यावरण के ज्यादा अनुकूल एवं कम संसाधन वाले तरीकों के बारे में बताया जाता है। प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में 25,000 से ज्यादा किसान आस्क दीना से जुड़े हैं।

साथ मिलकर ये प्लेटफॉर्म बायर को किसानों से न केवल कृषि आर्थिकी के विषय पर जुड़ने का मौका देते हैं, बल्कि रिस्क मैनेजमेंट, बाजार तक पहुंच और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी कंपनी किसानों से जुड़ पाती है। साथ ही डिजिटल इंटेलीजेंस एवं एआई का प्रयोग करके ज्यादा प्रभावी तरीके से कदम उठाना भी संभव होता है।

 

भारत, बांग्लादेश एवं श्रीलंका में बायर के क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिवीजनल हेड साइमन वीबुश ने कहा, ‘फार्मराइज सिर्फ एक एप नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर किसानों से जुड़ने के हमारे तरीके का मजबूत डिजिटल आधार भी है। हमारे लिए टेक्नोलॉजी का मतलब सिर्फ किसानों से संबंधों को बेहतर बनाना ही नहीं है बल्कि हमारे लिए यह अपनी विशेषज्ञता को डिजिटल एवं एआई आधारित समाधानों के साथ मिलाते हुए भरोसे को कई गुना बढ़ाने का माध्यम है।’

 

विरासत को इनोवेशन का साथ

बायर के डिजिटल प्लेटफॉर्म इसके बड़े फिजिटल प्रॉमिस का हिस्सा हैं, जिसमें वैश्विक स्तर पर कृषि क्षेत्र में 160 साल के अनुभव को डिजिटल टेक्नोलॉजी की ताकत के साथ मिलाया गया है। जमीनी स्तर पर मजबूत उपस्थिति के साथ-साथ बायर लगातार डिजिटल पहुंच बढ़ाने और ऐसे डाटा आधारित टूल्स में निवेश कर रही है, जिनसे विभिन्न टचपॉइंट्स पर किसानों के साथ जुड़ाव मजबूत हो।

भारत का एग्री-टेक इकोसिस्टम लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में बायर की फिजिटल पहल दिखाती है कि कैसे कृषि क्षेत्र की गहरी समझ, भरोसेमंद संबंधों और एआई समेत टेक्नोलॉजी के समझदारी से प्रयोग से सार्थक और बड़ा प्रभाव पैदा किया जा सकता है। फार्मराइज को मजबूत करते हुए तथा एलिवियो, फार्मराइज वन और आस्क दीना जैसे सहयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को विस्तार देते हुए बायर लगातार किसानों को सशक्त करने और भारतीय कृषि के लिए ज्यादा रेजिलिएंट एवं पर्यावरण के अनुकूल भविष्य को आकार देने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती दे रही है।

 


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