उदयपुर / प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की 486वीं जयंति पर डबोक स्थित महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पर स्थापित महाराणा प्रताप की अश्वारूढ प्रतिमा पर विद्यापीठ के कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत के मुख्य आतिथ्य में पुष्पांजलि एवं 31वां सर्व-समाज प्रतिभा सम्मान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम निदेशक एवं संयोजक भरतभानु सिंह देवड़ा ने बताया कि इस वर्ष का कैलाश कुमारी पिंकुराजे सम्मान शैक्षणिक उन्नयन के क्षेत्र में महिमा कुमारी चुण्डावत को, डॉ. चमनसिंह देवड़ा सम्मान जगदीश मेनारिया को, राणा पूँजा सम्मान चुन्नीलाल गमेती को. पन्नाधाय सम्मान श्रवण रेबारी को, गुरु रविदास सम्मान घनश्याम मेघवाल को, कुँवर ललितभानु सिंह सम्मान किशनसिंह देवड़ा को, कुँवर भूरसिंह सम्मान मनोहरसिंह चुण्डावत को, शैक्षणिक उन्नयन के क्षेत्र में, सांस्कृतिक पुनरूत्थान के लिये डॉ. डूंगरसिंह डबोक सम्मान, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण क्षेत्र में में ठा. उम्मेदसिंह डबोक सम्मान, स्व. भँवरसिंह मेड़ता (मरणोपरान्त) को, युवा कौशल के लिये गुरुशिखर सम्मान फतहनगर के पार्षद मुकेश खटीक को एवं शैक्षणिक उन्नयन हेतु द्रोणाचार्य सम्मान डबोक के आयुष तेली को प्रदान किया गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. ने कहा कि इतिहास में सबसे पहला नाम महाराणा प्रताप का आता है प्रताप ने जिस तरह से स्वाधीनता का बिगुल बजाया था , उनका एक ही ध्येय था कि हमारी स्वाधीनता अक्षुण रहनी चाहिए। हल्दीघाटी का युद्ध स्वतंत्रता बनाम साम्राज्यवाद का था। हर वर्ग ने प्रताप का साथ दिया। मेवाड़ में महाराणा प्रताप ने वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा व सर्व धर्म समभाव, विश्व शांति का जो पाठ पढ़ाया था, उसे वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना है, ताकि अपराध मुक्त समाज का निर्माण किया जा सके। स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रताप ने अपना पूरा राजपाट छोड दिया था। महाराणा प्रताप को देश व व्यक्ति के आत्म सम्मान एवं देश प्रेम, स्वतंत्रता एवं वीरता के लिए जाना जाता है। प्रताप का व्यक्तित्व एवं कृतित्व हमारे लिए सदा प्रेरणास्पद रहा है। देश के युवाओं को इनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
इस अवसर पर बिछड़ी सरपंच लोकेश पालीवाल, युवा उद्यमी अशोक कोठारी, मुकेश सिंघवी, मांगीलाल गमेती, खेमसिंह देवड़ा मेड़ता, लोकेश पाटीदार नरेन्द्र सिंह राठोड़ सहित कार्यकर्ताओं ने प्रताप की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित कर नमन किया।