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हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पर उदयपुर में राष्ट्र चेतना का विराट संगम

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17 Jun 26
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हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पर उदयपुर में राष्ट्र चेतना का विराट संगम

उदयपुर, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती एवं हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को उदयपुर के गांधी ग्राउंड में राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। प्रताप गौरव केंद्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के तत्वावधान में आयोजित ‘राष्ट्र चेतना संकल्प सभा’ में मेवाड़, वागड़, राजस्थान सहित देशभर से आए हजारों लोगों ने भाग लिया।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत का इतिहास पराधीनता का नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध निरंतर चले संघर्ष, प्रतिरोध और आत्मगौरव का इतिहास है। उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच का संघर्ष नहीं था, बल्कि राष्ट्रचेतना, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ा गया महासंग्राम था।

डॉ. भागवत ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन आज भी राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक प्रमाणों और समकालीन विवरणों से स्पष्ट होता है कि युद्ध के विभिन्न चरणों में मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था। उन्होंने कहा, “दुनिया में कहीं अकबर की जयंती नहीं मनाई जाती, जबकि महाराणा प्रताप का स्मरण आज भी जन-जन करता है। इतिहास का यह लोकनिर्णय स्वयं बताता है कि विजय किसकी हुई थी।”


उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप की सेना में केवल योद्धा वर्ग ही नहीं, बल्कि समाज का प्रत्येक वर्ग शामिल था। जाति, पंथ और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर संपूर्ण समाज राष्ट्ररक्षा के लिए एकजुट हुआ था। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे महाराणा प्रताप के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रोत्थान, समाज संगठन और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।

सभा में विशिष्ट अतिथि निम्बार्काचार्य श्रीजी श्याम शरण देवाचार्य ने कहा कि यह आयोजन केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि वर्षों से इतिहास के संबंध में फैलाई गई भ्रांतियों का निराकरण हो रहा है और महाराणा प्रताप के वास्तविक गौरव को पुनः स्थापित किया जा रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष डॉ. भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि हल्दीघाटी युद्ध के वास्तविक इतिहास को जन-जन तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि यह युद्ध केवल दो सेनाओं का संघर्ष नहीं था, बल्कि भारतीय अस्मिता, स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा का महान अभियान था।

सभा में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत एवं भागीरथ चौधरी, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, सांसद सी.पी. जोशी, डॉ. मन्नालाल रावत, सतीश पूनिया, महिमा कुमारी मेवाड़, धरोहर संरक्षण प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, नाथद्वारा विधायक एवं मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़, विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़, ताराचंद जैन, फूल सिंह मीणा, शंकर ढेचा, अर्जुनलाल जीनगर, श्रीचंद कृपलानी, लालाराम बैरवा, मेवाड़ राजपरिवार की सदस्य निवृत्ति कुमारी मेवाड़ सहित अनेक संत-महंत, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल, जे. नंदकुमार, प्रकाश चंद्र, गजेन्द्र सिंह तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

सभा के दौरान “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्”, “जय श्रीराम” और “महाराणा प्रताप अमर रहें” के जयघोषों से पूरा गांधी ग्राउंड गूंज उठा। प्रसिद्ध गायक प्रकाश माली ने देशभक्ति और महाराणा प्रताप पर आधारित गीतों की प्रस्तुतियों से माहौल को और अधिक ऊर्जावान बना दिया।

आयोजन स्थल पर हल्दीघाटी की पावन मिट्टी से आगंतुकों का तिलक किया गया। कुंभलगढ़, विजय स्तंभ और हल्दीघाटी युद्ध की आकर्षक प्रतिकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। कार्यक्रम को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाते हुए इसे पूर्णतः सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त रखा गया। चिकित्सा सुविधाओं, पेयजल और भोजन की व्यापक व्यवस्थाएं भी की गईं।

हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित यह ऐतिहासिक समारोह केवल अतीत के गौरव का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और स्वाभिमान के नवजागरण का सशक्त संदेश बनकर उभरा।


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