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महेश काले के 'अभंगवारी' मुंबई कॉन्सर्ट में निर्मला सीतारामन

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27 Jul 26
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महेश काले के 'अभंगवारी' मुंबई कॉन्सर्ट में निर्मला सीतारामन

मुंबई ने भक्ति, संगीत और भावनाओं से सराबोर एक अविस्मरणीय संध्या का अनुभव किया, जब राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक महेश काले ने आषाढ़ी एकादशी के शुभ अवसर के ठीक एक दिन बाद अपनी लोकप्रिय संगीत श्रृंखला ‘अभंगवारी’ प्रस्तुत की। इस विशेष अवसर पर भारत की माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने संत तुकाराम के अमर अभंग से प्रेरित महेश काले की नई भावपूर्ण रचना ‘लहानपण देगा देवा’ का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार के कल्चरल अफेयर्स एवं आईटी मंत्री आशीष शेलार भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

महेश काले इन दिनों अपने व्यापक भारत दौरे पर हैं। उनकी ‘अभंगवारी’ श्रृंखला इससे पहले इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और सिंगापुर में आयोजित सफल अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों के बाद भारत पहुँची है, जहाँ इसे दर्शकों का अभूतपूर्व प्रेम और सराहना मिली। लगभग एक दशक पहले महेश काले द्वारा परिकल्पित ‘अभंगवारी’ महाराष्ट्र की सदियों पुरानी वारकरी परंपरा से प्रेरित है। इसका उद्देश्य उन लोगों तक भी वारी की आध्यात्मिक अनुभूति पहुँचाना है, जो स्वयं इस तीर्थयात्रा में शामिल नहीं हो पाते। संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर जैसे महान संतों की अमर रचनाओं के माध्यम से यह प्रस्तुति वारी की भक्ति, समर्पण और सामूहिक ऊर्जा को मंच पर जीवंत करती है, जहाँ संगीत स्वयं भगवान विठ्ठल तक पहुँचने का माध्यम बन जाता है।

कार्यक्रम के दौरान निर्मला सीतारामन स्पष्ट रूप से भावुक नज़र आईं। वे महेश काले के साथ गुनगुनाती हुई दिखाई दीं और पूरे सभागार के साथ ‘विठ्ठला’ के जयघोष में भी शामिल हुईं। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कर्नाटक के हम्पी में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जहाँ दो युवाओं ने उनसे पूछा था कि वे स्वयं को तरोताज़ा और ऊर्जावान कैसे महसूस करती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने उनसे कहा कि मैं स्वयं को तरोताज़ा करने का केवल एक ही तरीका जानती हूँ और वह है संगीत सुनना। मैं कर्नाटक संगीत से अधिक परिचित हूँ, लेकिन जब उन्होंने पूछा कि क्या मैं हिंदुस्तानी संगीत भी सुनती हूँ, तो सबसे पहला नाम जो मेरे मन में आया, वह महेश काले का था।"

उन्होंने आगे बताया कि महेश काले की टीम के किसी सदस्य ने इस बातचीत को सुना और बाद में उन्हें इस कार्यक्रम का निमंत्रण भेजा। उन्होंने कहा, "महेश काले को आषाढ़ी एकादशी के तुरंत बाद लाइव सुनने का अवसर मिल रहा था, यह मेरे लिए किसी ‘वाह’ से कम नहीं था। मैं इस निमंत्रण को कभी मना नहीं कर सकती थी।"

महेश काले की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "माँ सरस्वती ने इन्हें आशीर्वाद दिया है। इनकी आवाज़, श्रोताओं से जुड़ने का उनका तरीका और अपने संगीत के माध्यम से जो संदेश ये देते हैं, वह हर दिल को छू जाता है। मैं माँ सरस्वती से प्रार्थना करती हूँ कि ये हज़ारों साल जिएँ।"

आशीष शेलार ने महेश काले की उस अटूट प्रतिबद्धता की प्रशंसा की, जिसके माध्यम से वे महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया भर के लोगों तक पहुँचा रहे हैं। उन्होंने अमेरिका में महेश काले के घर की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों मील दूर रहने के बावजूद उन्होंने अपने घर को एक ऐसे संगीत आश्रम का स्वरूप दिया है, जहाँ भारतीय संस्कृति, संगीत और संस्कारों की आत्मा जीवित है।

पूरे कार्यक्रम का वातावरण गहरी भक्ति से ओत-प्रोत रहा। महेश काले ने कार्यक्रम की शुरुआत कालजयी अभंग ‘राम कृष्ण हरी’ से की और इसके बाद ‘जगदोद्धारणा’, ‘सुंदर ते ध्यान’, ‘विठ्ठला’, ‘अबीर गुलाल’ सहित अनेक लोकप्रिय अभंगों की मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को आध्यात्मिक संगीत यात्रा पर ले गए। खचाखच भरे सभागार में हर आयु वर्ग के लोग पूरी तरह इस अनुभव में डूबे दिखाई दिए। कई लोग संगीत की लय पर झूमते रहे, अनेक लोग महेश काले के साथ गाते रहे, कुछ ने आँखें बंद कर आत्मिक शांति का अनुभव किया, जबकि कई श्रोता भावुक होकर आँसू भी नहीं रोक पाए।

शाम के सार को व्यक्त करते हुए निर्मला सीतारामन ने कहा कि किसी सभागार में बैठकर सैकड़ों लोगों के साथ भक्ति संगीत सुनने का अनुभव अद्वितीय होता है। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि वे अपने माता-पिता के साथ नियमित रूप से भागवत कथा, रामायण कथा और शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रमों में जाया करती थीं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी भले ही अपने मोबाइल फ़ोन में व्यस्त रहती हो, लेकिन ‘अभंगवारी’ जैसी संध्याओं का प्रत्यक्ष अनुभव किसी भी डिजिटल माध्यम से कहीं अधिक गहरा और प्रभावशाली होता है।

उन्होंने कहा, "हमें फिर से महेश जैसे कलाकारों को प्रत्यक्ष सुनने की संस्कृति अपनानी चाहिए। आप केवल संगीत नहीं सुनते, बल्कि वह आपके भीतर कुछ बदल देता है। इस सभा से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा और श्रोताओं की सहभागिता का अनुभव वास्तव में अतुलनीय है।" उन्होंने इस अविस्मरणीय संध्या के लिए महेश काले, उनकी पत्नी पूर्वा काले और पूरी टीम का हृदय से आभार भी व्यक्त किया।

 


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