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भारतीय सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय संगीत का सुंदर संगम - डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़

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25 Jan 26
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भारतीय सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय संगीत का सुंदर संगम - डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़


उदयपुर।उदयपुर के ऐतिहासिक सिटी पैलेस संग्रहालय में आज अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शास्त्रीय पियानोवादक कात्या ग्रिनेवा ने पियानो पर मनमोहक और भावप्रवण प्रस्तुतियाँ देकर संगीतप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन, उदयपुर के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी तथा मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
रुसी मूल की कात्या ग्रिनेवा रोमांटिक शास्त्रीय संगीत की अग्रणी पियानोवादक मानी जाती हैं। अपनी स्वप्निल, कोमल और काव्यात्मक वादन शैली के लिए विख्यात ग्रिनेवा विश्वप्रसिद्ध स्टाइनवे आर्टिस्ट हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित कार्नेगी हॉल में एकल पियानोवादक के रूप में ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है, जहाँ वे किसी भी अन्य महिला पियानोवादक की तुलना में सर्वाधिक बार प्रस्तुति देने वाली कलाकार हैं और 23 से अधिक सतत सीज़नों तक वहाँ प्रदर्शन कर चुकी हैं।
ग्रिनेवा को उनके असाधारण संगीत योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें प्रतिष्ठित गुसी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जो वर्ष 2006 में फिलीपींस की तत्कालीन राष्ट्रपति ग्लोरिया मैकापगल अरोयो द्वारा प्रदान किया गया था। इसके अतिरिक्त, उन्हें गुआम सरकार एवं न्यूयॉर्क स्टेट शील्ड्स द्वारा भी विशेष सम्मान प्राप्त हुए हैं।
अपने संगीत में आध्यात्मिक और अलौकिक अनुभूति समाहित करने की विशिष्ट क्षमता रखने वाली कात्या ग्रिनेवा चोपिन, लिस्ज़्ट, डेब्यूसी और बीथोवेन जैसे महान संगीतकारों की रचनाओं की संवेदनशील और मार्मिक व्याख्या के लिए जानी जाती हैं। उनका वादन स्वर की सुंदरता, भावनात्मक गहराई और सहज तकनीकी निपुणता का दुर्लभ संगम प्रस्तुत करता है। उन्होंने अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अमेरिका, मैक्सिको, एशिया और अफ्रीका सहित विश्व के अनेक देशों में सफल प्रस्तुतियाँ दी हैं। इसी क्रम को जारी रखते हुए मुंबई स्थित रॉयल ओपेरा हाउस में भी प्रस्तुति देंगी।
ऐतिहासिक सिटी पैलेस संग्रहालय की पृष्ठभूमि में आयोजित यह संगीतमय संध्या भारतीय सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय शास्त्रीय संगीत के सुंदर संगम का साक्षी बनी।


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