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“सिरफिरों का घर” : हास्य, इतिहास और संस्कृति का जीवंत मंचन

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10 Mar 26
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“सिरफिरों का घर” : हास्य, इतिहास और संस्कृति का जीवंत मंचन

उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र @ministryofculturegoi एवं हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के सहयोग से लोक कला एवं संस्कृति केंद्र प्रेक्षागृह, श्रीनगर (गढ़वाल), उत्तराखंड में आयोजित पाँच दिवसीय “हिमाद्रि नाट्य समारोह” के दूसरे दिन नाटक “सिरफिरों का घर” का प्रभावशाली मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. एस.एस. बिष्ट, इतिहासकार एवं चीफ हॉस्टल वॉर्डन, गढ़वाल विश्वविद्यालय तथा वरिष्ठ साहित्यकार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। यह नाट्य समारोह भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा और सृजनशीलता को मंच प्रदान कर रहा है।


नाटक “सिरफिरों का घर” एक पारिवारिक कथा पर आधारित रोचक प्रस्तुति है, जिसमें हास्य रस की प्रधानता दर्शकों को लगातार गुदगुदाती है। परिवार के भीतर होने वाली हल्की-फुल्की नोकझोंक और रोजमर्रा की स्थितियों को बेहद मनोरंजक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।

नाटक की विशेषता यह भी है कि हास्य और पारिवारिक प्रसंगों के साथ-साथ मेवाड़ के वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के महामानवीय चरित्र की झलक भी इसमें प्रभावशाली ढंग से दिखाई देती है, जो दर्शकों को इतिहास और प्रेरणा से जोड़ती है।


इस प्रस्तुति में संगीत, अभिनय, गायन, पुतली कला और मूकाभिनय जैसे प्रदर्शन कला के विभिन्न रूपों का प्रभावी प्रयोग किया गया है, जिससे नाटक और अधिक जीवंत बन गया। लगभग 70 मिनट की अवधि का यह नाटक मौलिक मनोरंजन के साथ सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक संबंधों और आपसी प्रेम का संदेश भी देता है।

नाटक का लेखन और निर्देशन विलास जानवे ने किया है। इसमें मनीष शर्मा, किरण जानवे, अमित मेनारिया, रेखा सिसोदिया और विलास जानवे ने प्रभावशाली अभिनय किया।

नाटक का संगीत समर्थ जानवे और भुवन शर्मा ने तैयार किया है, जबकि मंच सज्जा धर्मेश शर्मा द्वारा की गई। ध्वनि एवं प्रकाश योजना की जिम्मेदारी रेखा सिसोदिया और अमित मेनारिया ने संभाली।

यह प्रस्तुति मार्तण्ड फाउंडेशन, उदयपुर द्वारा तैयार की गई है, जो कला और संस्कृति के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश और भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है।


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