GMCH STORIES

युवा भारत की मूल जड़ो को पहचानें और विकास में सहभागी बने-विधानसभाध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी

( Read 657 Times)

24 Mar 26
Share |
Print This Page
युवा भारत की मूल जड़ो को पहचानें और विकास में सहभागी बने-विधानसभाध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी

जयपुर  । राजस्थान विधानसभाध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने उम्मीद जताई है कि देश के युवाओं और नागरिकों के वर्तमान जज़्बे को देखते हुए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा @2047 तक विकसित भारत का संकल्प समय से पहले ही साकार हो जाएगा । 

श्री देवनानी सोमवार को राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के मानविकी पीठ सभागार में विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई (एनएनएस )द्वारा विकसित भारत @2047 समर्थ युवा-सशक्त भारत प्रतिभा सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। समारोह की अध्यक्षता राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो अल्पना कटेजा ने की जबकि विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय सेवा योजना राजस्थान के क्षेत्रीय निदेशालय श्री एस एस भटनागर थे। 
विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि विकसित भारत @2047 केवल प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का सपना नहीं बल्कि अब हर भारतीय का संकल्प बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की कोई महाशक्ति बनने की होड़ में नहीं है बल्कि वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हुए पहले की तरह एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाना चाहता है। भारत सदैव विश्व का मार्गदर्शक रहा है और आगे भी बना रहेगा। आज के युवकों को भलीभांति यह बात समझनी होगी कि मेरा भारत महान और सबसे सर्वश्रेष्ठ है। 
उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े युवाओं का आह्वान किया कि वे भारत की मूल जड़ो को पहचाने और एआई के वर्तमान समय में युगानुकूल होते हुए नवाचारों और प्राचीन ज्ञान का समन्वय करके विकास की महान यात्रा में भारत की संस्कृति को आत्मसात करते हुए सहभागी बने। साथ ही सेवा की संस्कृरति को अपने जीवन का अंग बनाएं। विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने कहा कि हम सभी भारतवासियों को इस बात का गर्व होना चाहिए कि हम सदियों पहले से ही विश्व गुरु और विकसित सभ्यता और संस्कृति वाला देश रहें है । वास्कोडिगामा ने भारत को नहीं खोजा था बल्कि भारत ने पूरे विश्व को खोजा है। समुद्र में रास्ता भटके वास्कोडिगामा को तो गुजरात का एक नाविक भारत तक लाया था। विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि भारत हमेशा से ही ज्ञान का केन्द्र रहा है और सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, धार्मिक, तकनीकी आदि जीवन के हर क्षेत्र में विश्व में सबसे आगे रहा है लेकिन दो हजार वर्षों की गुलामी के कारण हम अपनी मूल जड़ों और पहचान को भूल गए थे । अंग्रेजों ने भारत के लोगों को सिर्फ कलर्क बना उनकी प्रतिभा को पंगु बनाने का प्रयास किया वरना वेद, पुराणों और उपनिषदों के साथ ही रामायण एवं महाभारत जैसे महान ग्रन्थ भारत की महान सभ्यता और संस्कृति के साथ ही ज्ञान के अपार भण्डार है जिन्हें आज की युवा पीढ़ी को पढ़ना और आत्मसात करना चाहिये । 

विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने बताया कि चाहें रामायण कालीन पुष्पक विमान की बात हों, अथवा प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी की सूंड की सर्जरी की बात हो,हमारी सभ्यता और संस्कृति में हर क्षेत्र में भारत के सर्वश्रेष्ठ होने की बात को दर्शाया गया है। गणित का ज्ञान भी विश्व को भारत ने ही दिया है।आर्युवेद और योग भी की भारत की देन है जिसे आज सारा विश्व अंगीकार कर रहा है । प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से आज हर वर्ष विश्व योग दिवस मनाया जाने लगा है। स्वास्थ्य के प्रति यह क्रान्ति भारत की देन है । ढाई हजार वर्ष पुरानी अजन्ता और एलोरा की गुफाओं की पेंटिंग हमारी पुरानी केमिकल इंजीनियरिंग को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि मैंने अपनी जर्मनी जापान आदि देशों की यात्राओं में स्वयं देखा है कि वहाँ यूजुर्वेद की युक्तियों पर शोध कार्य हों रहे हैं । आज विदेशी भारत आकर पुष्कर और हरिद्वार आदि पवित्र स्थलों की मिट्टी में लौट पौट होते है और कहते है कि हम कितने ही बड़े अमीर क्यों न हों हमें मन की असली शांति तो भारत की मिट्टी में ही मिलती है।आज सर्वे बताते है कि अमेरिका जैसे देश में भी 11 प्रतिशत लोग मानसिक रोगों और 33 प्रतिशत लोग नींद की बीमारी से ग्रसित है। 
विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने अपने राष्ट्रीय सेवा योजना शिविरों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उदयपुर के सुदूर आदिवासी कोटड़ा में उन्होंने जब नया प्रयोग करते हुए एनएसएस छात्रों को आदिवासियों के छप्पर वाले घरों में एक दिन गुजारने भेजा था तो दूसरे दिन अपने अनुभव कथन सुनाते सभी के आँखों में आँसू थे क्यों कि वे इससे पहले कभी गरीब आदिवासियों के जीवन से रूबरू नहीं हुए थे। श्री देवनानी ने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने जीवन में राष्ट्रीय एकता की भावना के साथ ही सनातन संस्कृति एवं सेवा संस्कार के भाव भी जागृत करें तथा गरीबों के प्रति संवेदनशील बनें तभी उन्हें यह एहसास हो पायेगा कि सेवा का यह भाव उन्हें किसी भी प्रकार की विलासिता और करोड़ों रुपए के पैकेज से भी अधिक सन्तोष और आत्म संतुष्टि एवं शांति प्रदान करेगा ।
इस अवसर पर विधानसभाध्यक्ष श्री देवनानी ने राजस्थान विश्व विद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई (एनएनएस) की राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय गतिविधियों में भाग लेने वाली प्रतिभाओं, श्रेष्ठ् एनएसएस कार्यकर्ताओं और प्रभारियों को प्रमाण पत्र और बैच प्रदान कर पुरस्कृत और सम्मानित किया। 
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो अल्पना कटेजा ने राष्ट्रीय सेवा योजना राजस्थान के क्षेत्रीय निदेशालय श्री एस एस भटनागर का विश्वविद्यालय में एन एस एस की बीस इकाइयों को बढ़ा कर पूर्ववत तीस यूनिट्स करने को घोषणा के लिए उनका आभार जताया तथा विश्वविद्यालय में चलाई जा रही आनन्दम पहल की जानकारी दी ।
समारोह के प्रारंभ में विश्वविद्यालय राष्ट्रीय सेवा योजना की समन्वयक डॉ नीकी चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एन एन एस गतिविधियों की जानकारी दी । मंच संचालन एनएसएस प्रभारी डॉ अमित ने किया।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like