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गौरांग ने एवेरेस्ट बेस कैंप पहुंच लहराया तिरंगा

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27 Mar 26
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गौरांग ने एवेरेस्ट बेस कैंप पहुंच लहराया तिरंगा

उदयपुर |मेवाड़ के 23 वर्षीय  गौरांग शर्मा ने युवाओ के लिए एक और मिसाल कायम की है |

गौरांग द्वारा 13 मार्च 2026, प्रातः 09:12 (NST) / 08:58 बजे (IST)एवरेस्ट बेस कैंप (5364 मीटर) पर तिरंगा लहराया |ये यात्रा लगभग 137 किलोमीटर की रही जो की 08 घंटे मैं पूर्ण की |  

गौरांग बताते हे एक निजी यात्रा के दौरान  जैसलमेर की एक वीकेंड ट्रिप पर उनकी  मुलाकात एक कल्लुम (ब्रिटिश यात्री)  से हुई, जिसने एवरेस्ट बेस कैंप तक का ट्रेक पूरा किया था। उसी पल उनके मन में एक सवाल उठा  "जब वो कर सकता है तो मैं क्यों नहीं" | वही से  प्रेरणा लेकर ये मुकाम हासिल किया |

इस यात्रा के दौरान गौरांग को कई कठिनाई को सामना भी करना कई मित्रो ने तो कहा नहीं हो पायेगा लेकिन एक जूनून और साहस का उदहारण दे गौरांग ने ये मुकाम हासिल कर  इतिहास के पन्नो मैं अपना  लिख दिया है | 

 

क्या है एवरेस्ट बेस कैंप-

एवरेस्ट बेस कैंप (EBC) दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले पर्वतारोहियों के लिए आधार शिविर है। यह दो मुख्य स्थानों पर स्थित है: दक्षिण में नेपाल (5,364 मीटर) और उत्तर में तिब्बत (5,150 मीटर)। यह एक प्रसिद्ध ट्रैकिंग गंतव्य है जहाँ से हिमालय के अकल्पनीय दृश्य देके जा सकते हे ।

 

परिवार और शहर को बड़ा गर्व -

गौरांग की माता डॉ आभा शर्मा ने कहा की उन्हें अपने पुत्र पर गर्व है और वह आगे भी इसी तरह परिवार और समाज का नाम रोशन करता रहेगा |गौरांग की इस उपलब्धि पर उदयपुर ही नहीं पुरे मेवाड़ के लिए  खुशी का पल है |

गौरांग आज के हर युवा के लिए ऊर्जाश्रोत बन गए है एवं यह साबित कर दिया है की इच्छाशक्ति ,संकल्प और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है | 

 

यह सिर्फ एक ट्रेक नहीं था, बल्कि एक जंग थी शरीर, परिस्थितियों और खुद से।

 

गौरांग बताते है की 16 दिनों की इस यात्रा के दौरान उनके पैरों में गंभीर छाले पड़े,दर्दनाक चाफिंग से हर कदम मुश्किल हो रहा था, डिहाइड्रेशन और मौसम बदलाव के कारण शरीर का संतुलन बिगड़  रहा  था, ठंडी हवाओं और बर्फ के टुकड़ों ने चेहरे पर चोट की,कई बार लगा कि अब लौट जाना ही सही होगा लेकिन मन मैं दृढ़ संकप था की हार नहीं माननी है।

 

गौरांग ने बताय जो ट्रेक आसान माना जाता है , वह मेरे लिए बेहद कठिन लग रहा था । मई 2025 में, एक गंभीर दुर्घटना के कारण वे  लंबे समय तक बीमार रहे । शरीर कमजोर था, सहनशक्ति लगभग खत्म हो चुकी थी |यह यात्रा  गौरांग ने बिना किसी गाइड के पूरी की |

 

गौरांग ने दिसंबर 2025 में, चंद्रशिला (3680 मीटर) का ट्रेक भी कर चुके हे | 

 

चंद्रशिला (3680 मीटर से 4000 मीटर तक का शिखर) जो की उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित एक लुभावनी चोटी है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर, तुंगनाथ के ठीक ऊपर है। यह "चंद्रमा की चट्टान" के रूप में प्रसिद्ध है, जो हिमालय की 360-डिग्री चोटी (नंदा देवी, चौखंबा, केदारनाथ) का शानदार नज़ारा पेश करती है। यह चोपटा से ट्रेक (लगभग 5 किमी) के माध्यम से आसानी से सुलभ है, जो शुरुआती लोगों के लिए भी एक लोकप्रिय ट्रेकिंग गंतव्य है।

 

गौरांग के जीवन की यह दूसरी उपलब्धि है |  भविष्य के लिए गौरांग माऊंटेनियरिंग कोर्स की तैयारी  कर रहे हे |  


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