उदयपुर। झीलों की नगरी में गुरुवार की शाम को बालीवुड नाईट सजी जिसमें बॉलीवुड की फेमस सिंगर और पद्मश्री अनुराधा पौडवाल ने अपनी आवाज के जादू से लोगों को सम्मोहित कर लिया। दर्शक फिल्मी गानों की बहार में ऐसे खोए कि कभी कोई ताली बजाकर, तो कभी उनके सुरों में सुर मिलाकर मग्न हो गए। अनुराधाजी के पुराने गानों पर उदयपुर ने पूरा साथ दिया सब गुनगुनाने लगे।
शहर के भारतीय लोककला मंडल में संगीतमय कार्यक्रम में अनुराधा पौडवाल ने बालीवुड नाईट में एक से बढक़र नए और पुराने गानों के साथ उदयपुर वालों को बांध दिया। स्व. श्रीमती इंदिरा मुर्डिया की 73वीं जन्म जयंती के अवसर पर इंदिरा इंटरप्राईजेज, कश्ती फाउंडेशन एवं यूएसएम ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में यह सुरमई शाम सजाई गई। शहर की जनता के लिए प्रवेश निशुल्क रहा और शाम 7 बजे लोककला मंडल पूरा भर गया था।
प्रारंभ में इंदिरा इंटरप्राइजेज के डायरेक्टर डॉ. अजय मुर्डिया, नीतिज मुर्डिया, क्षितिज मुर्डिया, कश्ती फाउंडेशन की फाउंडर श्रीमती श्रद्धा मुर्डिया, आस्था मुर्डिया, यूएसएम के डॉ. एच. एस. भुई ने शहरवासियों का स्वागत किया।
अनुराधा पौडवाल ने जब 1990 की फिल्म ‘थानेदार’ का सुपरहिट गाना ‘तम्मा-तम्मा लोगे’ गाया तो शहरवासी भी उनके साथ गाते हुए खड़े होकर झूम उठे। जब उन्होंने 1990 की फिल्म ‘आशिकी’ का सदाबहार गाना ‘धीरे धीरे से मेरी जिंदगी में आना’... गाना सुनाया तो युवाओं ने भी इसे खूब पसंद किया। इसी फिल्म का ‘नजऱ के सामने जिगर के पास’... रोमांटिक गाना सुनाया तो खूब शोर मचा। अनुराधा पौडवाल के इन गीतों को उदयपुर वालों ने जर्बदस्त पसंद किया और खूब प्रशंसा की।
आगे अनुराधा ने जब 1991 की फिल्म ‘दिल है के मानता नहीं’ का मशहूर गाना ‘अदाएं भी है मोहब्बत भी है’... जब सुनाया तो उन्होंने मौजूद ऑडियंस का दिल जीत लिया। उन्होंने ‘अजीब दास्ताँ है ये’... गीत भी सुनाया। फस्र्ट हाफ के बाद पुरस्कार वितरण समारोह हुआ।
सेकंड हाफ में अनुराधा पौडवाल मंच पर आए उससे पहले ही ऑडियंस ने अनुराधा—अनुराधा के साथ स्वागत किया। अनुराधा ने सबसे पहले 1972 में आई शोर फिल्म का सर्वश्रेष्ठ गाना ‘एक प्यार का नगमा है’.. सुनाया तो पूरे पांडाल ने उनका साथ दिया और सभी ने ये गाना गुनगुनाया। उन्होंने 1965 की फिल्म ‘जब जब फूल खिले’ का गीत ‘ये समा समा है ये प्यार का’... गाना सुनाया तो उस जमाने की यादों में सब खो गए। 1966 की ममता फिल्म का गीत ‘रहे ना रहे हम’.. सुनाया। इसके बाद जैसे ही अनुराधाजी ने 1991 की ब्लॉकबस्टर फिल्म साजन का सुपरहिट गीत ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम’... सुनाया तो तालियों की गडग़ड़ाहट से पूरा लोककला मंडल गूंज उठा। उन्होंने प्रसिद्ध गीत ‘सांसों की जरूरत है’... गीत भी सुनाया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कश्ती फाउंडेशन के कपिल पालीवाल, डॉ. चित्रसेन, कुनाल मेहता तथा यूएसएम की उर्वशी सिंघवी, लता भंडारी, संजय वर्मा, डॉ. सीमा सिंह, विपिन कावड़िया, उमेश मनवानी, टिंकू छाबड़ा एवं अभय बांठिया का सहयोग रहा ।
दीपक वोराजी को दिया लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड :
इंदिरा इंटरप्राइजेज के डायरेक्टर डॉ. अजय मुर्डिया ने बताया कि इस सजी शाम के बीच इंदिरा इंटरप्राईजेज और विज्ञान समिति के संयुक्त तत्वावधान में ‘इंदिरा मुर्डिया लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ दिया गया। यह पहला अवार्ड है जो आगे प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर दिया जाएगा। पहला अवार्ड पूर्व भारतीय राजनेता दीपक वोराजी को उनकी उत्कृष्ट राजनीतिक सेवाओं के लिए प्रदान किया गया। इसके तहत उन्हें प्रशति पत्र एवं पांच लाख रुपये की राशि प्रदान की गई।
वेले पार्किंग की व्यवस्था, सुविधा मिली सभी को :
कार्यक्रम स्थल पर आयोजकों की ओर से इस बार वेले पार्किंग की भी व्यवस्था की गई। इससे अनुराधा पौड़वाल को सुनने आए शहरवासियों को अपनी गाडिय़ां दूर—दूर तक पार्किंग करने के लिए जो जतन करने पड़ते उससे राहत मिली।
इंद्र कुमार की प्रस्तुतियां आज :
श्रीमती श्रद्धा मुर्डिया ने बताया कि 27 मार्च को मशहूर बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक इंद्र कुमार की फिल्मों के संगीत का सफर एक संगीतमय यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भी प्रवेश नि:शुल्क, लेकिन पास से रहेगा । मुर्डिया ने बताया कि कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण हूनरबाज टीवी कार्यक्रम के माध्यम से पहचान बनाने वाले हार्मोनी ऑफ पाइन्स पुलिस बैंड का रहेगा। यह 15 सदस्यीय हिमाचल प्रदेश से पुलिस बैंड पहली बार उदयपुर आकर अपनी प्रस्तुति देगा।