उदयपुर: मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय को नए कुलपति प्रो. कैलाश डाका के रूप में नई दिशा मिली है। पदभार ग्रहण करने के बाद अपने पहले विस्तृत संवाद में उन्होंने विश्वविद्यालय के सामने मौजूद चुनौतियों, पेंशन संकट, प्रशासनिक लंबित मामलों, शैक्षणिक सुधारों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
प्रो. डाका ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता छात्र, शिक्षक और विश्वविद्यालय का सुचारू संचालन है। उन्होंने मीडिया इंटरव्यू के लिए विश्वविद्यालय समय समाप्त होने के बाद का समय तय कर यह संदेश दिया कि विश्वविद्यालय का काम किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए।
“वर्क इज़ वर्शिप” मेरा सिद्धांत
प्रो. डाका ने कहा कि “वर्क इज़ वर्शिप” उनके जीवन के प्रमुख सिद्धांतों में शामिल है। उनके अनुसार विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों से जुड़े कार्य सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं और बाकी गतिविधियां उसके बाद आती हैं।
छात्रों की सुविधा के लिए फिर शुरू हो सकती है हेल्पलाइन
संवाद के दौरान विश्वविद्यालय की बंद पड़ी छात्र हेल्पलाइन का मुद्दा भी उठाया गया। यह हेल्पलाइन पहले संभागभर के विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी साबित होती थी, जिससे छात्रों को बार-बार विश्वविद्यालय आने की बजाय फोन पर ही महत्वपूर्ण जानकारी और समाधान मिल जाते थे।
इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कुलपति प्रो. कैलाश डाका ने कहा कि उन्हें इस सुविधा की जानकारी पहली बार मिली है और वे इसकी पूरी जानकारी प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि यह व्यवस्था छात्रों के हित में उपयोगी और प्रशासनिक रूप से संभव पाई गई तो इसे दोबारा शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। इससे परीक्षा, प्रवेश, प्रमाण पत्र और अन्य विश्वविद्यालय संबंधी समस्याओं के समाधान में छात्रों को बड़ी राहत मिल सकती है।
पेंशन संकट विश्वविद्यालयों के सामने बड़ी चुनौती
कुलपति ने राजस्थान के विश्वविद्यालयों में चल रहे पेंशन संकट को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि जोधपुर विश्वविद्यालय में भी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को कठिन परिस्थितियों में आंदोलन करना पड़ा था।
प्रो. डाका ने बताया कि उनकी स्वयं की पेंशन भी चार महीने तक लंबित रही थी। उन्होंने कहा कि केवल जमीन बेचकर पेंशन समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है और इसके लिए दीर्घकालिक वित्तीय योजना की आवश्यकता है।
आर्थिक सुधार और नए राजस्व स्रोतों पर फोकस
उन्होंने संकेत दिए कि विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कई नए प्रयास किए जाएंगे। निजी कॉलेजों के निरीक्षण शुल्क, उद्योगों के साथ तालमेल, स्किल प्रोग्राम, सेल्फ फाइनेंस कोर्स और एलुमिनाई नेटवर्क को मजबूत करने जैसे विकल्पों पर काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे पुराने विश्वविद्यालयों के कुलपति मिलकर पेंशन समस्या के समाधान पर चर्चा कर रहे हैं।
लंबित जमीन मामलों और प्रशासनिक मुद्दों पर होगी कार्रवाई
प्रो. डाका ने कहा कि वे चंपा बाग प्रकरण और विश्वविद्यालय की अन्य लंबित जमीन संबंधी फाइलों का अध्ययन करेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय हित में जो भी बेहतर होगा, उस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
संविदा कर्मचारियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण
संविदा कर्मचारियों की समस्याओं पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में यदि कर्मचारियों को सीधे भुगतान किया जा रहा है तो यह अच्छी बात है, क्योंकि कई संस्थानों में ठेकेदारी व्यवस्था कर्मचारियों के शोषण का कारण बनती है।
एनएएसी रैंकिंग और शैक्षणिक सुधारों पर जोर
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय को बेहतर एनएएसी ग्रेड की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि समय पर परीक्षाएं और सेशन संचालन उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं तथा इसके लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को बताया ऐतिहासिक कदम
प्रो. डाका ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सराहना करते हुए इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली से बाहर निकालकर भारतीय ज्ञान परंपरा की ओर ले जाएगी।
उन्होंने मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप संस्कृति, मल्टीलिंग्वल सिस्टम और इंडियन नॉलेज सिस्टम जैसे बिंदुओं को भविष्य के भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया।
घोषणाओं से ज्यादा परिणामों पर रहेगा ध्यान
पीएचडी नीति, नो डिले सेशन और अन्य लंबित शैक्षणिक मामलों पर उन्होंने कहा कि पहले वे पूरी व्यवस्था का अध्ययन करेंगे और उसके बाद ही निर्णय लेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी कार्यशैली घोषणाओं से ज्यादा परिणामों पर आधारित रहेगी।