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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पांच देशों की हालिया यात्रा सर्वोच्च सम्मान और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का हिन्दी में *परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” बोलने का गिफ्ट 

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21 May 26
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पांच देशों की हालिया यात्रा सर्वोच्च सम्मान और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का हिन्दी में *परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” बोलने का गिफ्ट 

जी एन भट्ट 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस समय पांच देशों की यात्रा पर हैं। उनका यह दौरा 15 मई से 20 मई 2026 तक था । इस दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा की । इटली इस यात्रा का अंतिम पड़ाव था जहां उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से गर्मजोशी के साथ मुलाकात की। दोनों नेताओं के राजनीतिक संबंधी के साथ ही उनकी केमिस्ट्री इटली भारत के एक नए सांस्कृतिक संबंधों को उजागर करने वाली है।मोदी का यह विदेश दौरा ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, हरित प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग और भारत-यूरोप संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज देर रात या 21 मई की सुबह भारत लौट सकते हैं। 

 

 

अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव इटली में भी चार अन्य देशों की तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जोरदार स्वागत किया गया और सर्वोच्च अवार्ड भी प्रदान किया गया। मीडिया में प्रधानमंत्री मोदी को विदेशों में मिले अवार्ड्स की जो सूची प्रकाशित प्रसारित हुई है उससे पूरी दुनिया में भारत का डंका बज उठा है। साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता का परिचायक भी है। इटली यात्रा में  प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्वि पक्षीय वार्ता एवं स्वागत के दौरान हिन्दी में बोला गया यह कथन कि “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” की पूरे विश्व की मीडिया में चर्चा है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का यह कहना कि “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” आज के दौर में अत्यंत प्रासंगिक भी माना जा रहा है। किसी भी राष्ट्र, समाज या व्यक्ति की प्रगति के पीछे कठिन मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सबसे बड़ी भूमिका होती है। दुनिया में वही देश आगे बढ़ते हैं, जो निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच के साथ कार्य करते हैं।

आज भारत सहित अनेक देश विकास और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इसके पीछे नेतृत्व की दूरदृष्टि और कर्मठता महत्वपूर्ण कारण है। जॉर्जिया मेलोनी का यह संदेश युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर परिश्रम, धैर्य और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता ही व्यक्ति को नई उपलब्धियों तक पहुंचाती है। यही विचार राष्ट्र निर्माण और वैश्विक प्रगति की मजबूत आधारशिला भी है।

 

विश्व राजनीति के वर्तमान दौर में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है और इसके केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सक्रिय कूटनीति, निर्णायक नेतृत्व और अथक परिश्रम की चर्चा वैश्विक मंचों पर हो रही है। बीते कुछ वर्षों में भारत ने आर्थिक, तकनीकी, पर्यावरणीय और मानवीय क्षेत्रों में जिस प्रकार अपनी पहचान बनाई है, उसने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। यही कारण है कि आज अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत और उसके नेतृत्व की सराहना कर रही हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्था द्वारा भारत के प्रयासों को सम्मानित किया जाना और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है” कहना, वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का संकेत माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यकाल में भारत को केवल एक विकासशील राष्ट्र के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र के साथ उन्होंने देश के भीतर विकास योजनाओं को गति दी, वहीं विदेश नीति में भारत की स्वतंत्र और प्रभावशाली पहचान बनाई। कोरोना महामारी के दौरान “वैक्सीन मैत्री” अभियान के माध्यम से अनेक देशों को सहायता पहुंचाकर भारत ने मानवता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। इसके बाद जी-20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी ने भारत की संगठन क्षमता और वैश्विक स्वीकार्यता को और मजबूत किया।

संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों द्वारा भारत की योजनाओं और अभियानों की लगातार सराहना की जा रही है। स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। डिजिटल इंडिया और यूपीआई मॉडल आज दुनिया के कई देशों के लिए अध्ययन का विषय बन चुके हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की उपलब्धियों को सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान केवल किसी सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक क्षमता और मेहनत का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली का सबसे बड़ा आधार उनका अनुशासन और अथक परिश्रम माना जाता है। दुनिया के अनेक बड़े नेता सार्वजनिक मंचों पर उनकी ऊर्जा और कार्यक्षमता की प्रशंसा कर चुके हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी द्वारा यह कहना कि “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है”, वास्तव में उस कार्य संस्कृति की ओर संकेत करता है जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जीवन और शासन में अपनाया है। कठिन परिस्थितियों में भी लगातार सक्रिय रहना, लगातार यात्राएं करना, विश्व नेताओं से संवाद बनाए रखना और देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना उनकी शैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।

आज भारत की विदेश नीति केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रही। भारत अब वैश्विक मुद्दों पर निर्णायक राय रखने वाला देश बन चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया का संकट, जलवायु परिवर्तन हो या वैश्विक आर्थिक अस्थिरता—भारत ने हर मुद्दे पर संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने “वसुधैव कुटुंबकम्” की भारतीय भावना को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे भारत की छवि एक शांतिप्रिय और विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में और मजबूत हुई।

विश्व में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का असर आर्थिक क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है, वैश्विक कंपनियां भारत को नए अवसरों के केंद्र के रूप में देख रही हैं और भारतीय युवाओं की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता मिल रही है। यह परिवर्तन केवल नीतियों से संभव नहीं होता, बल्कि इसके पीछे नेतृत्व की स्पष्ट दृष्टि और निरंतर मेहनत होती है।

निस्संदेह, आज पूरी दुनिया में भारत और प्रधानमंत्री मोदी की चर्चा केवल राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि विकास, कूटनीति और वैश्विक सहयोग के नए प्रतिमान स्थापित करने के कारण हो रही है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था द्वारा मिला सम्मान और विश्व नेताओं की सकारात्मक टिप्पणियां यह दर्शाती हैं कि भारत अब विश्व मंच पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। यह समय भारत के लिए केवल गौरव का नहीं, बल्कि और अधिक जिम्मेदारी निभाने का भी है। परिश्रम, संकल्प और दूरदृष्टि के बल पर भारत जिस प्रकार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, वह आने वाले वर्षों में विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

 

 

देखना है अमेरिका इजरायल और ईरान युद्ध तथा इसके कारण खाड़ी देशों तथा पूरे विश्व में उत्पन्न तेल संकट और अन्य वैश्विक समस्याओं के मध्य भारत अपने देश और देश के बाहर कूटनीतिक मोर्चे पर और कितना सफल होकर विष गुरु बन कर उभर पाएगा?

 


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