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अशोका पैलेस में सजी सुरों की महफिल, “सदाबहार नगमे” में गूंजे स्वर्णिम दौर के अमर गीत

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01 Jun 26
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अशोका पैलेस में सजी सुरों की महफिल, “सदाबहार नगमे” में गूंजे स्वर्णिम दौर के अमर गीत

उदयपुर। सुरों की मण्डली संस्था वरिष्ठ विंग की ओर से अशोका पैलेस स्थित मधुश्री ऑडिटोरियम में आयोजित संगीतमय संध्या “सदाबहार नगमे” में संगीत प्रेमियों ने पुराने दौर के सदाबहार गीतों का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम में शहर के कई प्रतिभागियों ने मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, किशोर कुमार एवं अन्य महान गायकों के कालजयी गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पूरे आयोजन के दौरान सभागार तालियों की गूंज से सराबोर रहा और श्रोता स्वर्णिम संगीत युग की यादों में खो गए।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी डॉ. रीना राठौड़ ने कहा कि संगीत समाज को जोड़ने वाली सबसे सशक्त सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि पुराने दौर के गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं और ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने सुरों की मण्डली द्वारा किए जा रहे सांस्कृतिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संगीत के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्द का वातावरण निर्मित होता है।

सुरों की मण्डली के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि संस्था का उद्देश्य संगीत प्रेमियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना तथा सदाबहार गीतों की परंपरा को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने पूरे मनोयोग और समर्पण के साथ प्रस्तुति देकर आयोजन को यादगार बना दिया।

संस्था के सचिव अरुण चौबीसा ने कहा कि “सदाबहार नगमे” केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगीत प्रेमियों को एक सूत्र में पिरोने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि पुराने दौर के गीतों में भावनाओं, शब्दों और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जिसे संरक्षित और प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है।

वहीं संस्था के कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने बताया कि कार्यक्रम में कलाकारों एवं श्रोताओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। उन्होंने कहा कि सुरों की मण्डली भविष्य में भी ऐसे आयोजन करती रहेगी, जिससे शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई पहचान मिल सके और प्रतिभाओं को मंच प्राप्त हो। कार्यक्रम के सफल आयोजन में हेमा जोशी, एच. काज़ी एवं राजकुमार बापना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रतिभागियों ने दी शानदार प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में कार्यक्रम में डॉ. रीना राठौड़ ने “अभी ना जाओ छोड़ के  दिल अभी भरा नहीं”, फैयाज खान ने “हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह”, मुकेश माधवानी ने “छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा”, आराध्या वैष्णव ने “दिल दीवाना बिन सजना के”, कमल जूनेजा ने “छलकाए जाम”, विजय सिंह राजपूत ने “आने से उसके आये बहार”, सुनील शर्मा ने “चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे”, नलिनी बांधु ने “जाने क्यों लोग मोहब्बत किया”, हेमा जोशी ने “एक लड़की भीगी भागी सी”, कमलेश कुमावत ने “भोले ओ भोले”, जय किशन असवानी ने “यकीन कर लो मुझे मोहब्बत”, ज्योति मोदीयानी ने “निंदिया से जागी बहार”, अखिलेश जोशी ने “ओ साथी रे तेरे बिना भी”, वेणु जोशी ने “मेरे ख्वाबों में जो आये”, रतन पालीवाल ने “तू इस तरह से मेरी जिंदगी में”, कांतीलाल पुनमिया ने “ये रातें ये मौसम नदी का किनारा”, सी.पी. जैन ने “जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे”, कुबेर साहलोत ने “खिलते हैं गुल यहां”, अशोक कुमार जोशी ने “चलो एक बार फिर से अजनबी”, अशोक परियानी ने “बार बार देखो हजार बार देखो”, लालूराम गमेती ने “मैंने अपना दिल दे दिया”, माला छाबतवानी ने “जनम जनम का साथ है”, कामिनी कटारिया ने “न तुम हमें जानो”, रजनी जोशी ने “रंग दिल की धड़कन भी”, मधु शर्मा ने “कोई आएगा लाएगा दिल का चैन”, बृजलाल सोनी ने “झनक झनक तोरी बाजे पायलिया”, राजकुमार बापना ने “तू मिले दिल खिले”, संगीता गोस्वामी ने “खिलते हैं गुल यहां”, एच. काज़ी ने “आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार”, सी.एस. सांखला ने “बेकरार करके हमें यूं न जाइये”, रेखा वर्मा ने “जिस पथ पर चला”, अम्बालाल साहू ने “जब दीप जले आना”, भगवती मेनारिया ने “तू ही मेरे मंदिर”, डॉ. नरेश शर्मा ने “दिल की आवाज भी सुन”, विजया अमेटा ने “ले तो आये हो हमें सपनों में” तथा अजीत सिंह खींची ने “घुंघरू की तरह बजता ही रहा हूं” गीत प्रस्तुत कर दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की।
 


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