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38 दिनों से बंद है अस्पताल की भोजनशाला, जरूरतमंद हो रहे परेशान, राशन हो रहा खराब 

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02 Jul 26
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38 दिनों से बंद है अस्पताल की भोजनशाला, जरूरतमंद हो रहे परेशान, राशन हो रहा खराब 

-मरीजों व परिजनों को बाहर दुकान पर जाकर खाने की मजबूरी 
-प्रशासन ने भोजनशाला चालू करवाने का दिया आश्वासन, लेकिन कई दिन बीत गए 
उदयपुर।
महाराणा भूपाल चिकित्सालय परिसर में मरीजों और उनके परिजनों को 8 वर्षों से निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने वाली भोजनशाला पिछले 38 दिनों से बंद पड़ी है। 25 मई को शॉर्ट सर्किट से गैस सिलेंडर में आग लगने की छोटी सी घटना के बाद सुरक्षा कारणों से भोजनशाला को बंद कर दिया गया था, जिसके बाद से हजारों जरूरतमंद मरीजों एवं उनके परिजनों को भोजन के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 
संस्थान पदाधिकारियों ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 600 लोगों को दोनों समय भोजन एवं खास तौर पर मरीज को पौष्टिक दलिया उपलब्ध कराया जाता था। इनमें दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीज, उनके परिजन, वृद्धजन, मजदूर वर्ग तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार शामिल रहते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों के सामने पहले से ही दवा, जांच, यात्रा और रहने का खर्च होता है। ऐसे में भोजनशाला उनके लिए बड़ी राहत साबित होती थी।
भोजनशाला बंद होने के बाद अनेक जरूरतमंद लोगों को बाहर होटलों में बाहर जाकर ठेलों पर पैसे खर्च कर भोजन करना पड़ रहा है। कई परिवार ऐसे भी हैं जो आर्थिक अभाव के कारण एक समय का भोजन करके दिन गुजारने को मजबूर हैं। कई मरीजों के परिजन सुबह से शाम तक अस्पताल परिसर में ही रहते हैं और भोजन की व्यवस्था न होने से उन्हें अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि घटना के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा भोजनशाला को सील कर दिया गया था। भोजनशाला परिसर में रखी खाद्य सामग्री, राशन और अन्य उपयोगी सामान भी लंबे समय से बंद रहने के कारण खराब होने की स्थिति में पहुंच रहा है। संस्थान ने अस्पताल प्रशासन से कई बार चर्चा कर वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया ताकि सेवा बाधित न हो, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
संस्थान से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल भोजन वितरण नहीं, बल्कि मानव सेवा का एक सतत अभियान है। पिछले 8 वर्षों से से हजारों जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों की भूख मिटाने वाली यह सेवा अस्पताल में आने वाले गरीब और असहाय लोगों के लिए किसी संबल से कम नहीं रही है।
कई परिवारों के लिए यह भोजनशाला आशा और राहत का केंद्र बनी हुई थी।
संस्थान ने जिला प्रशासन, अस्पताल प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि सुरक्षा मानकों की आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करवाकर अथवा अस्थायी वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराकर भोजनशाला को जल्द से जल्द पुनः प्रारंभ करने की अनुमति दी जाए, ताकि अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले जरूरतमंद लोगों को पुनः निःशुल्क भोजन का लाभ मिल सके।
जनप्रतिनिधियों को भी बता चुके हैं परेशानी
भोजनशाला को वापस चालू करवाने को लेकर पदाधिकारियों ने शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा व कलेक्टर गौरव अग्रवाल को भी जानकारी दी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला, जबकि अस्पताल प्रशासन को केवल अन्यत्र जगह देनी है। 
भूख इंतजार नहीं करती
अस्पताल में भर्ती मरीज की पीड़ा जितनी बड़ी होती है. उससे कम चिंता उसके परिजन की नहीं होती। इलाज, दवाइयों और जांचों के बीच कई परिवारों के पास भोजन की व्यवस्था करने तक के पैसे नहीं बचते। ऐसे समय निःशुल्क भोजनशाला केवल भोजन नहीं परोसती, बल्कि यह भरोसा भी देती है कि संकट की इस घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है। पिछले 38 दिनों से यह सहारा बंद होने से सैकड़ों परिवार प्रतिदिन प्रभावित हो रहे हैं।
रोज 600 लोगों की थाली हुई खाली
जिस भोजनशाला से प्रतिदिन लगभग 600 लोगों को दोनों समय भोजन मिलता था, वहां आज ताला लटका हुआ है। एक महीने के करीब समय में हजारों भोजन की थालियां जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच सकी हैं। अस्पताल आने वाले कई गरीब परिवारों के लिए यह भोजनशाला उनके दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण सहारा थी। सेवा बंद होने से सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ा है जिनकी आय सीमित है और जो इलाज के लिए गांवों से उदयपुर आते हैं। 
फिर कब जलेगी मानवता की रसोई ?
वर्षों से संचालित यह भोजनशाला केवल एक रसोई नहीं, बल्कि मानवता की मिसाल रही है। यहां किसी की जाति, धर्म, क्षेत्र या पहचान नहीं पूछी जाती, केवल उसकी आवश्यकता देखी जाती है। अस्पताल परिसर में आने वाला हर जरूरतमंद व्यक्ति यहां सम्मान के साथ भोजन प्राप्त करता था। आज भी लोग भोजनशाला के बाहर आकर पूछते हैं कि सेवा कब शुरू होगी। 
समाज और प्रशासन से उम्मीद
संस्थान का मानना है कि सुरक्षा सर्वाेपरि है, लेकिन मानवीय सेवा भी उतनी ही आवश्यक है। यदि स्थायी व्यवस्था में समय लग रहा है तो प्रशासन अस्थायी स्थान उपलब्ध कराकर इस सेवा को पुनः शुरू करवाने पर विचार कर सकता है।


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