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राजस्थान में सहकारिता आंदोलन एक नए युग में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है 

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07 Jul 26
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राजस्थान में सहकारिता आंदोलन एक नए युग में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है 

अमूल द्वारा राजस्थान में विश्व का सबसे बड़ा अन्न भंडारण केंद्र स्थापित करने की घोषणा

 

गोपेन्द्र नाथ भट्ट 

 

राजस्थान में सहकारिता आंदोलन एक नए युग में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। कृषि, डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में जिस व्यापक परिवर्तन की कल्पना की जा रही थी, वह अब धरातल पर आकार लेने लगा है। इसी क्रम में अमूल द्वारा राजस्थान में विश्व का सबसे बड़ा अन्न भंडारण केंद्र स्थापित करने की घोषणा तथा भारतीय बीज सहकारी समिति के माध्यम से आधुनिक और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले उन्नत बीजों की उपलब्धता भविष्य की कृषि व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो सकते हैं।

 

 

केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में नई दिल्ली के भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय द्वारा सहकारिता मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह राजस्थान को कई सौगाते मिली। इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी उपस्थित थे। यमुना जल समझौता और पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में उनका आत्म विश्वास और उत्साह सातवें आसमान पर दिखा ।

 

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत मंडपम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सामने आए आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान आज देश में सहकारी क्षेत्र का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश की लगभग 4,875 पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियां) तीन या उससे अधिक व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। यही नहीं, इन समितियों के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) तथा जन औषधि केंद्र जैसी सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंच रही हैं। इससे सहकारी समितियां अब केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि ग्रामीण विकास के बहुआयामी केंद्र बन चुकी हैं।केंद्र सरकार की हर पंचायत में सहकारी समिति बनाने की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत राजस्थान में अब तक 5,279 नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है। इनमें 1,977 एम-पैक्स स्थापित कर राजस्थान ने पूरे देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की सदस्यता दिलाने में भी राजस्थान का शीर्ष स्थान इस बात का संकेत है कि राज्य के किसान नई तकनीक और वैज्ञानिक खेती को तेजी से अपना रहे हैं।

 

 

कार्यक्रम मेवसबसे अधिक चर्चा का विषय बना अमूल का वह प्रस्ताव, जिसके तहत राजस्थान में विश्व का सबसे बड़ा अन्न भंडारण केंद्र स्थापित किया जाएगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में हर वर्ष बड़ी मात्रा में अनाज केवल भंडारण की कमी और खराब रखरखाव के कारण नष्ट हो जाता है। यदि आधुनिक तकनीक से युक्त विशाल भंडारण केंद्र तैयार होता है तो किसानों की उपज सुरक्षित रहेगी, अनाज की बर्बादी रुकेगी और बाजार में कीमतों का बेहतर संतुलन भी बना रहेगा। इससे किसानों को अपनी उपज उचित समय पर बेचने की सुविधा मिलेगी और उन्हें मजबूरी में औने-पौने दाम पर फसल बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही किसानों को ऐसे उन्नत बीज उपलब्ध कराने की योजना, जो लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे और जल्दी खराब नहीं होंगे, कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। बेहतर गुणवत्ता वाले बीज सीधे तौर पर अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और किसानों की आय में वृद्धि से जुड़े होते हैं। भारतीय बीज सहकारी समिति द्वारा विकसित आधुनिक बीज तकनीक राजस्थान जैसे विविध जलवायु वाले राज्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है।सहकारिता क्षेत्र में तकनीकी नवाचार भी तेजी से बढ़ रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान 50 हजार पैक्स का ई-पैक्स में रूपांतरण किया गया, जिससे सहकारी समितियों के कामकाज में डिजिटल पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। इसके अलावा अन्न भंडारण योजना के तहत 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण तथा 47 नए गोदामों का शिलान्यास यह दर्शाता है कि देश में कृषि अवसंरचना को मजबूत करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पोर्टल 3.0, जियो टैग मोबाइल एप, एनडीडीबी के दूध सप्लाई समीक्षा डैशबोर्ड तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं के शुभारंभ से यह स्पष्ट हुआ कि सहकारिता अब आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रही है। डेयरी क्षेत्र में भी गुणवत्ता सुधार और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने सही कहा कि जितनी मजबूत सहकारिता होगी, उतनी ही सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनेगी। भारत आज दुग्ध उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है और इसमें सहकारी संस्थाओं की बड़ी भूमिका रही है। अब यही मॉडल कृषि और बीज उत्पादन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोल रहा है।

 

 

राजस्थान के लिए सहकारी क्षेत्र की उपलब्धियां केवल सरकारी आंकड़े नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण विकास की नई दिशा का संकेत हैं। यदि अमूल का विशाल अन्न भंडारण केंद्र, आधुनिक बीज व्यवस्था, डिजिटल सहकारिता और बहुउद्देशीय पैक्स योजनाएं समयबद्ध ढंग से पूरी होती हैं तो राजस्थान केवल कृषि उत्पादन में ही नहीं, बल्कि कृषि प्रबंधन, भंडारण और सहकारी नवाचार के क्षेत्र में भी देश का अग्रणी मॉडल बन सकता है। इस प्रकार स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि सहकारिता अब केवल किसानों को ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं रही। यह गांवों में रोजगार, तकनीक, विपणन, भंडारण, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनती जा रही है। राजस्थान जिस गति से इस परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है, वह आने वाले वर्षों में राज्य को देश की सहकारी राजधानी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।

 


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